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सेना को 18 हजार फीट ऊंचाई पर तैनात करने के लिए मिलेंगे 570 लॉजिस्टिक ड्रोन

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नई दिल्ली: भारतीय सेना (Indian Army) 12 हजार फीट तक और 18 हजार फीट की ऊंचाई पर तैनात करने के लिए दो तरह के 570 लॉजिस्टिक ड्रोन (Logistics drone) खरीदेगी।

12 हजार फीट तक की मानक स्थितियों की तैनाती के लिए लॉजिस्टिक ड्रोन (S) और 18 हजार फीट के बीच तैनाती के लिए लॉजिस्टिक ड्रोन (High Altitude) होंगे।

दोनों तरह के 570 लॉजिस्टिक ड्रोन खरीदने के लिए रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन (RFI) जारी कर दिया है।

RFI के अनुसार भारतीय सेना के लिए 570 लॉजिस्टिक ड्रोन के दो संस्करणों की परिकल्पना की गई है। यानी 12 हजार फीट तक तैनाती के लिए लॉजिस्टिक ड्रोन (S) और 12-18 हजार फीट के बीच तैनाती के लिए लॉजिस्टिक ड्रोन (High Altitude) होंगे।

नाइट थर्मल सेंसर को छोड़कर ड्रोन के लिए भार वहन क्षमता की सीमा होनी चाहिए

भारतीय सेना को हवा या झोंके की स्थिति, बारिश या बर्फ आदि में संचालन की क्षमता वाले लॉजिस्टिक ड्रोन की जरूरत है।

साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में अग्रिम चौकियों पर तैनात सैनिकों को खाद्य एवं रसद (Food & Logistics) की आपूर्ति के लॉजिस्टिक कार्यों को पूरा करने के लिए लॉजिस्टिक ड्रोन की मांग है।

RFI में यह भी कहा गया है कि प्रत्येक लॉजिस्टिक ड्रोन में एक एरियल व्हीकल (AV), एक मैन पोर्टेबल ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन (MPGCS), एक रिमोट वीडियो टर्मिनल (RVT), एक कलर डे वीडियो कैमरा (A Color Day Video Camera), मोनोक्रोमैटिक नाइट थर्मल सेंसर (Monochromatic Night Thermal Sensor) और अतिरिक्त बैटरी (Spare Battery) का एक सेट होना चाहिए।

इसके अलावा कलर डे वीडियो कैमरा, मोनोक्रोमैटिक नाइट थर्मल सेंसर को छोड़कर ड्रोन के लिए भार वहन क्षमता की सीमा होनी चाहिए।

ड्रोन सिस्टम पर ध्यान केन्द्रित किया

दरअसल, 2021 में शुरू की गई भारत (India) की ड्रोन उदारीकरण नीति (Drone Liberalization Policy) का उद्देश्य ड्रोन के वाणिज्यिक और औद्योगिक उपयोग में तेजी लाना है।

सरकार लास्ट-माइल लॉजिस्टिक्स में अक्षमताओं से निपटने के लिए लॉजिस्टिक्स ड्रोन तकनीक की ओर रुख कर रही है, क्योंकि यह परिचालन लागत को नियंत्रित करने के साथ ही ट्रैफ़िक की बाधाओं को दूर कर सकती है।

आपूर्ति सिस्टम (Supply System) को अधिक कुशल, निर्बाध और समय प्रभावी बनाने की जरूरतों को देखते हुए सेना ने भी ड्रोन सिस्टम पर ध्यान केन्द्रित किया है।

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