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भागलपुर में बाढ़ का कहर, NH-80 पर चढ़ा बाढ़ का पानी

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भागलपुर: गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से जिले के गंगा से सटे इलाके में बाढ़ का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।

भागलपुर कहलगांव सड़क मार्ग के घोषपुर फरका के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या (एनएच)-80 पर बाढ़ का पानी चढ़ जाने से इस सड़क मार्ग पर आवाजाही बंद हो चुकी है।

इंजीनियरिंग कॉलेज में भी बाढ़ का पानी भर गया है। इस वजह से वहां के छात्रों ने हॉस्टल खाली कर दिया है।

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के पीजी गर्ल्स हॉस्टल को भी बाढ़ के पानी भरने के कारण खाली करा दिया गया है।

इसके अलावा नाथनगर के दियारा क्षेत्रों के कई गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। नवगछिया के मदरौनी और इस्माइलपुर की स्थिति और भी ज्यादा खराब है।

बिहपुर खरीक प्रखंड की सीमा पर स्थित नरकटिया नन्हकार जमींदारी बांध पर पानी के बढ़ते दबाव के कारण इसके टूटने का खतरा बढ़ता जा रहा है।

इस बांध में पानी का रिसाव भी शुरू हो चुका है। इस बांध के टूटने से नरकटिया, गौरीपुर, अमरपुर, लत्तीपुर, बभंगामा, सोनबरसा, बिहपुर, मरवा, जयरामपुर सहित कई गांव बाढ़ के चपेट में आ सकते हैं।

गंगा नदी ने रौद्र रूप अख्तियार कर लिया है। गंगा की प्रचंड धारा के आगे कटाव से लोगों की संपत्ति को बचाना प्रशासान के लिए चुनौती बन गया है।

गंगा की तेज धारा से होने वाले कटाव का खतरा अब सबौर स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज पर मंडराने लगा है।

कुछ दिन पूर्व ही सीएम नीतीश ने हवाई सर्वेक्षण कर इंजीनियरिंग कॉलेज को कटाव से बचाने का निर्देश दिया था।

गंगा की धारा इंजीनियरिंग कॉलेज के पीछे तक पहुंच गई है। जबकि अभी भी गंगा में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।

जब पानी घटेगा तो कटाव का खतरा बढ़ेगा। कटाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने सारी तैयारी कर रखी है लेकिन गंगा के विकराल रूप के के आगे सारे उपाय विफल साबित हो रहे हैं।

कई जगहों पर बोल्डर पीचिंग और जिओ बैग नदी किनारे प्रशासन ने लगवाए थे। लेकिन सभी जिलों बैग गंगा में समा चुके हैं।

सीएम के निर्देश के बाद जिलाधिकारी भागलपुर भी सबौर इंजीनियरिंग कॉलेज का निरीक्षण कर चुके हैं।

कॉलेज पर कटाव के खतरे को देखते हुए बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से इंजीनियरिंग कॉलेज से जियाउद्दीन चौक तक बोल्डर पीचिंग कराने का निर्देश दिया है।

गंगा में कटाव को रोकने के लिए बाढ़ और नियंत्रण विभाग की ओर से पहले ही लाखों रुपए खर्च किए जा चुके हैं। फिर भी खतरा टला नहीं है।

इस बार गंगा में आए उफान ने प्रशासन के साथ यहां पढ़ने वाले बच्चों के माथे पर चिंता की लकीर खींच दी है बता दें कि, 2015 में गंगा का जल स्तर बढ़ने के कारण इंजीनियरिंग कॉलेज के पीछे कटाव शुरू हुआ था।

जहां करीब 11 लाख की राशि से कटाव निरोधी कार्य हुआ था। बाढ़ आते ही वह सभी पानी में समा गये।

2016 में इंजीनियरिंग कॉलेज के पश्चिमी छोर 0 पॉइंट से जियाउद्दीनपुर चौका गांव के पूर्वी छोर तक 1080 मीटर तक कटाव रोकने के लिए फ्लड फाइटिंग के नाम पर प्रतिदिन तीन लाख से अधिक खर्च हुआ।

सैकड़ों मजदूरों के माध्यम से कटाव स्थल की पाइपिंग के लिए बालू मिट्टी से भरे बोरे जैसे तैसे डाले गए, जो अब गंगा में समा चुके हैं।

उधर गोराडीह के जमसी गांव पर बाढ का खतरा मंडराने लगा है। देखते ही देखते गांव में एक दर्जन से ज्यादा घरों में बाढ़ पानी प्रवेश कर चुका है।

जलसंसाधन विभाग द्वारा दोनों जगहों पर बचाव कार्य जारी रखा गया है। फिलहाल दोनों जगहों पर बांध को सील कर दिया गया है। जिससे पानी का बहाव आवासीय क्षेत्रों की तरफ नहीं हो रहा है।

गंगोत्री जागरण मंच के अध्यक्ष गुलशन कुमार ने बताया कि जल स्तर में अगर वृद्धि होती रही और मूसलाधार वर्षा हुई तो कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।

गुलशन कुमार ने दोनों जगहों का स्थलीय जायजा लिया है। इधर बाढ़ संघर्षात्मक बल के अध्यक्ष महेंद्र प्रसाद ने कहा कि बचाव कार्य जारी है और दोनों जगहों पर दिन रात नजर रखा जा रहा है।

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