मणिपुर में राहुल के काफिले को रोकने को कांग्रेस ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण, PM पर…

News Aroma Media
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नई दिल्ली : Congress के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के काफिले को मणिपुर (Manipur) के चुराचांदपुर की ओर जाने से रोके जाने के बाद कांग्रेस ने इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार देते हुए कहा कि उनकी यात्रा भारत जोड़ो यात्रा (बीजेवाई) की भावना के अनुरूप है।

यह भी पूछा कि ‘सभी वर्गों को सुनने और उनके दुखों पर मरहम लगाने के उनके प्रयासों को क्यों बाधित किया जा रहा।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश (JaiRam Ramesh) ने एक ट्वीट में कहा, ‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि मोदी सरकार राहुल गांधी को राहत शिविरों का दौरा करने और इंफाल के बाहर लोगों से बातचीत करने से रोक रही है।मणिपुर में राहुल के काफिले को रोकने को कांग्रेस ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण, PM पर… Congress termed stopping of Rahul's convoy in Manipur as unfortunate, on PM…

मणिपुर की उनकी दो दिवसीय यात्रा भारत जोड़ो यात्रा की भावना के अनुरूप

“मणिपुर की उनकी दो दिवसीय यात्रा भारत जोड़ो यात्रा की भावना के अनुरूप है। प्रधानमंत्री चुप रहना या निष्क्रिय रहना चुन सकते हैं, लेकिन मणिपुरी समाज के सभी वर्गों को सुनने और उनके घावों पर मरहम लगाने के राहुल गांधी के प्रयासों को क्यों रोकें?”

राज्यसभा सांसद की यह टिप्पणी राहुल गांधी के काफिले को चुराचांदपुर की ओर जाने से रोके जाने के बाद आई।मणिपुर में राहुल के काफिले को रोकने को कांग्रेस ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण, PM पर… Congress termed stopping of Rahul's convoy in Manipur as unfortunate, on PM…

राहुल गांधी राहत शिविरों में रहने वाले प्रभावित परिवारों से मिलने के लिए दो दिवसीय दौरे पर मणिपुर पहुंचे।

गुरुवार को उनका ग्रीनवुड अकादमी, तुइबोंग और चुराचांदपुर सरकारी कॉलेज और सामुदायिक हॉल, कोन्जेंगबाम और मोइरांग कॉलेज में प्रभावित परिवारों से मिलने का कार्यक्रम है।मणिपुर में राहुल के काफिले को रोकने को कांग्रेस ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण, PM पर… Congress termed stopping of Rahul's convoy in Manipur as unfortunate, on PM…

प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल

कांग्रेस ने मणिपुर में 3 मई से शुरू हुई हिंसा पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाया है।

कांग्रेस पूर्वोत्तर राज्य में स्थिति को नियंत्रित करने में बुरी तरह विफल रहने के लिए मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह (N. Biren Singh) को हटाने की भी मांग कर रही है।

अब तक हिंसा में 300 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोगों को राहत शिविरों में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

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