CUJ के दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का समापन

News Alert
3 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

रांची: झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (Jharkhand Central University)के वाणिज्य एवं वित्त विभाग की ओर से ‘आत्मनिर्भर भारत: बिल्डिंग रेजिलीयंस, सस्टैनबिलिटी एंड ग्लोबल कम्पेटिटिवनेस’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार (National Seminar) का शनिवार को समापन हो गया।

पिछले दो दिनों से इस सेमिनार में आत्मनिर्भर भारत (Aatmnirbhar Bharat) के निर्माण के विभिन्न आयामों पर देश के अनेक भागों से आये विषय-विशेषज्ञों एवं शोधार्थियों (Experts And Researchers) ने अपने विचारों और शोध-आलेखों के माध्यम से चिंतन-मंथन किया।

इस समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बिनोद बिहारी कोयलांचल विश्वविद्यालय (Bihari Koyalanchal University) के कुलपति प्रो सुखदेव भोई ने कहा कि प्रत्येक नागरिक के विज़न और मिशन में आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और वोकल फ़ॉर लोकल (Make in India and Vocal for Local) इन तीनों तत्वों का विशेष महत्व है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के महत्व को रेखांकित करते हुए इसके कार्यान्वयन पर भी बल दिया।

मौके पर CUJ के कुलपति प्रो. क्षिति भूषण दास ने कहा कि भारत का आधारभूत ढ़ांचा पहले से काफी मजबूत है, जिसमें इन्हेरेंट रेज़िलिएनस,हेल्पिंग इन्वायर्नमेंट और ईज ऑफ़ बिज़नेस शामिल है।

कृषि से सम्बंधित मुद्दों को भी ध्यान में रखना बहुत जरूरी: प्रो. क्षिति भूषण दास

उन्होंने कहा कि आर्थिक नीति और उसकी पहल हमें मौजूदा समय में आत्मनिर्भर भारत निर्माण की ओर ले जा रही हैं। भारत में लाए नए आर्थिक सुधार और क़ानून आत्मनिर्भरता के कई रास्ते खोल दिए हैं।

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के निर्देशक (शोध) प्रो डी एन सिंह (Prof D N Singh) ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है और यहां पचास प्रतिशत से अधिक GDP कृषि पर आधारित है ।

इसलिए आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में कृषि से सम्बंधित मुद्दों को भी ध्यान में रखना बहुत जरूरी है।

वाणिज्य और वित्त विभाग के (Department of Commerce and Finance) अध्यक्ष Dr K B Singh ने इस सेमिनार की सफलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लगभग 200 शोध आलेख इस बात का प्रमाण है कि हमने आत्मनिर्भर भारत के निर्माण से सम्बंधित अनेक पक्षों को एक दूसरे से साझा किया।

इस दौरान University के कुलसचिव एस एल हरि कुमार, प्रो. भगवान सिंह, प्रो सुभाष यादव, प्रो वी के श्रोत्रिय, प्रो अजय द्विवेदी, डॉ केबी सिंह, डॉ बटेश्वर सिंह, डॉ अजय प्रताप यादव, डॉ उपेन्द्र सत्यार्थी, अमित यादव एवं अनेक विद्यार्थी और शोधार्थी (Student And Researcher) मौजूद थे।

Share This Article