डॉ अरुण कुमार सिंह चुने गये IMA झारखंड के अध्यक्ष, ये होगी नई कमिटी

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रांची: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए )झारखंड 2021-23 की मतगणना संपन्न हो गयी। 186 वोट में दो वोट रद्द हुए। जबकि 184 वोटों की गिनती हुई।

इसमें डॉ अरुण कुमार सिंह झारखंड आईएमए के अध्यक्ष चुने गए। उन्हें 92 वोट मिले। जबकि डॉ रामजी लाल अग्रवाल को 48 और डॉ आरपी श्रीवास्तव को 40 वोट मिले।

जबकि कोल्हान प्रमंडल से उपाध्यक्ष पद के लिए चुनावी मैदान में डॉ केके शेहगल और डॉ अरुण विजय बाखला थे। डॉ केके शेहगल को 104 वोट मिला। जबकि डॉ बाखला को 73 वोट मिले।

31 वोट से डॉ केके शेहगल जीत कर झारखंड आईएमए के उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए। इसी तरह सचिव के लिए डॉ प्रदीप सिंह और डॉ प्रभात कुमार आमने-सामने थे।

डॉ प्रदीप को 105 वोट और डॉ प्रभात को 76 वोट मिले। 29 वोट से डॉ प्रदीप सिंह ने जीत दर्ज की। जबकि कोल्हान प्रमंडल से संयुक्त सचिव के उम्मीदवार डॉ अजय कुमार प्रसाद को 115 वोट और डॉ अशोक कुमार सिंह को 66 वोट मिले। 49 वोट से डॉ अजय कुमार प्रसाद की जीत हुई। कोषाध्यक्ष पद के लिए डॉ बीपी कश्यप निर्विरोध चुने गए।

ये है झारखंड आईएमए की नई कमिटी

झारखंड आईएमए की नई कमिटी में डॉ अरुण कुमार सिंह को अध्यक्ष, डॉ आरएस दास (निर्विरोध)हेड क्वार्टर उपाध्यक्ष, उत्तरी

छोटानागपुर- डॉ बीरेंद्र कुमार पंकज (निर्विरोध),दक्षिणी छोटानागपुर डॉ रितेश रंजन (निर्विरोध),

कोल्हान डॉ केके शेहगल, संथाल परगना डॉ आरएन प्रसाद (निर्विरोध),पलामू डॉ अजय कुमार सिंह (निर्विरोध), सचिव डॉ प्रदीप कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष डॉ बीपी कश्यप (निर्विरोध), संयुक्त सचिव हेड क्वार्टर- डॉ संजय कुमार जयसवाल, दक्षिणी छोटानागपुर- डॉ देवनोस सेस, कोल्हान- डॉ अजय कुमार प्रसाद, संथाल परगना- डॉ गोपाल जी शरण, पलामू- डॉ सुरेंद्र कुमार सिंह शामिल है।

मौके पर झारखंड आईएमए के नवनिर्वाचित सचिव डॉ प्रदीप सिंह ने कहा कि यह जीत आईएमए और सभी चिकित्सकों की जीत है। उन्होंने कहा कि हम अपने सभी चिकित्सकों के सुख-दुख में साथ है।

उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए मैं तत्परता से काम करूंगा डॉ प्रदीप ने कहा कि मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट के लिए हम लोग इंतजार कर रहे हैं।

यदि ज्यादा विलंब हुआ तो आगे की रणनीति तय करेंगे। क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट पर डॉ प्रदीप ने कहा कि झारखंड सरकार को हरियाणा मॉडल लागू करना चाहिए, नहीं तो छोटे-छोटे क्लिनिक बंद हो जाएंगे और इसका खामियाजा झारखंड की जनता को भुगतना पड़ेगा।

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