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जनहित याचिकाकर्ता के आपराधिक मामले को ले हाई कोर्ट गंभीर, निचली अदालत से…

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रांची : झारखंड हाई कोर्ट (Jharkhand High Court) में जनहित याचिका दायर करने में याचिकाकर्ता द्वारा अपने आपराधिक मामला (Criminal Case) के बारे में नहीं दर्शाए जाने को गंभीरता से लिया है।

कोर्ट ने निचली अदालत से याचिकाकर्ता कुमार मनीष (Kumar Manish) से संबंधित आपराधिक मामले के पूरे रिकॉर्ड को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने मामले में निचली अदालत (Lower court) द्वारा याचिकाकर्ता को बरी किए जाने संबंधी आदेश का अवलोकन करने के बाद मौखिक टिप्पणी की।

कोर्ट ने अपनी टिप्पी में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित मामले में गवाहों को उपस्थित कराने के लिए न्यायालय द्वारा उचित कार्रवाई नहीं की गई। इसलिए मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता के आपराधिक मामलों से संबंधित फाइल कोर्ट में अगली सुनवाई में प्रस्तुत किया जाए।

मामले के पूरे रिकॉर्ड को निचली अदालत से प्रस्तुत करने का निर्देश

इससे पहले मामले में राज्य सरकार एवं प्रतिवादी वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार की ओर से पीआईएलकर्ता कुमार मनीष के बारे में बताया गया कि उनके खिलाफ दो आपराधिक मामले दर्ज हुए थे, जिसकी सूचना उनके द्वारा याचिका में नहीं दी गई थी।

इसलिए इस जनहित याचिका को खारिज किया जाना चाहिए। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि उन्हें संबंधित मामले में बरी कर दिया गया है, जिसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता के संबंधित आपराधिक मामले के पूरे रिकॉर्ड को निचली अदालत से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

दरअसल यह मामला भ्रूण जांच को लेकर पूर्वी सिंहभूम के तत्कालीन सिविल सर्जन के द्वारा अल्ट्रासाउंड क्लीनिकों को दिए गए रजिस्ट्रेशन का विरोध करने वाले जनहित याचिका से जुड़ा है।

मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी

मामले में पूर्व सिविल सर्जन डॉक्टर महेश्वर प्रसाद की ओर से अधिवक्ता ऋतु कुमार एवं अल्ट्रासाउंड क्लीनिक संचालकों की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने पैरवी की।

उनकी ओर से कोर्ट को बताया गया की वर्तमान में उपायुक्त, जमशेदपुर द्वारा पूर्वी सिंहभूम के सभी 27 अल्ट्रासाउंड क्लीनिक संचालकों को लाइसेंस जारी कर दिया गया है, इसलिए अब यह विषय विवाद में नहीं है।

शुक्रवार को मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्र की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई। कोर्ट ने मामले में पूर्व सिविल सर्जन को शपथ पत्र (Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

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