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झारखंड के हाई स्कूलों में 13 प्रधानाध्यापकों की 16 साल बाद होगी नियुक्ति

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रांची: झारखंड के हाई स्कूलों में नियुक्ति प्रक्रिया (Recruitment process) शुरू होने के 16 वर्ष और परीक्षा लेने के 15 वर्ष बाद 13 प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति होगी।

यह नियुक्ति वर्ष 2006 में जमा आवेदन के आधार पर ही की जा रही है। ये राज्य की विडंबना है कि जिन प्रधानाध्यापकों कि नियुक्ति होनी है, उनमें दो इस वर्ष और दो अगले वर्ष सेवानिवृत्त हो जायेंगे। इसको लेकर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने पत्र जारी किया है।

विभाग ने इन 13 अभ्यर्थियों को प्रधानाध्यापक पद पर योगदान देने को कहा है। राज्य के राजकीयकृत हाई स्कूल (Government High School) में प्रधानाध्यापक पद पर सीधी नियुक्ति के लिए वर्ष 2006 में आवेदन मांगा गया था।

257 प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति के लिए परीक्षा ली गयी थी

257 प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति के लिए परीक्षा ली गयी थी। इसके बाद झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा जारी रिजल्ट के आधार पर 257 चयनित अभ्यर्थियों की काउंसलिंग शिक्षा विभाग द्वारा की गयी।

विभाग ने काउंसलिंग में 90 अभ्यर्थियों को ही मापदंड के अनुरूप पाया। इसके बाद विभाग ने आयोग को पत्र लिखा।

आयोग ने विभाग से 12 बिंदुओं पर मार्गदर्शन मांगा। इसके अनुरूप बाद में नियुक्ति के लिए दो अलग-अलग लिस्ट जारी की गयी। एक में 91 और दूसरे में 72 नामों की अनुशंसा की गयी।

बाद में आयोग द्वारा कुल 163 अभ्यर्थियों का नाम जारी किया गया, जिन अभ्यर्थियों का चयन बाद में नहीं हो सका, उन्होंने हाइकोर्ट (High court) में याचिका दाखिल की थी।

सभी सेवानिवृत्ति की कगार पर

मनोज कुमार सिंह-2029, शांति सिंह-2023, मिताली सरकार-2030,जोन सुशांति गुड़िया-2023, अनंत कुमार झा-2025, रमेश कुमार सिंह-2022 , प्रमोद कुमार-2022, महेंद्र प्रसाद सिंह-2025,निशा भरद्वाज-2025, डॉ उदय चंद्र झा-2024, नीना सहाय-2024, मेराजुल हक-2026, करम सिंह महतो-2027।

Education Department द्वारा नियुक्ति को लेकर जारी पत्र में कहा गया है कि यह नियुक्ति नयी नियुक्ति मानी जायेगी। नियुक्त प्रधानाध्यापकों को नयी पेंशन योजना का लाभ मिलेगा।

प्रधानाध्यापक को जिला शिक्षा पदाधिकारी के आदेश के अनुरूप योगदान देने को कहा गया है। प्रधानाध्यापकों को सभी प्रमाण पत्र जिला शिक्षा पदाधिकारी के माध्यम से अनुमोदन के लिए भेजने को कहा गया है। नियुक्त होने वाले 13 में से 9 प्रधानाध्यापक 2025 तक सेवानिवृत्त हो जायेंगे।

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