भगवान शिव ने भी युद्ध से पूर्व किए थे पूत्र गणेश की पूजा

News Aroma Media
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Ganesh Chaturthi : हिंदू धर्म के मान्यताओं के अनुसार सबसे पहले भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है। इन्हें लोग गौरी पुत्र विघ्नहर्ता भी कहते हैं।
इसी कारणवश किसी भी मांगलिक कार्य की शुरुआत श्री गणेश से होती है, ताकि बिना किसी बाधा के कार्य पूर्ण हो सके।

पौराणिक कथा

Lord Shiva also worshiped son Ganesha before the war

पौराणिक कथा के अनुसार, त्रिपुरासुर नामक असुर ने भगवान ब्रह्माजी से अमरता का वरदान मांगा। तब ब्रह्माजी ने कोई और वरदान मांगने को कहा। तब त्रिपुरासुर ने कहा, हे प्रभु! हमारे लिए तीन पुरिया वरदान में दे दीजिए। जिस पर ब्रह्माजी ने तथास्तु कह कर वरदान दे दिया।
वरदान मिलने के बाद तारकाक्ष के लिए स्वर्णपुरी, कमलाक्ष के लिए रजतपुरी और विद्युन्माली के लिए लौहपुरी का निर्माण हुआ। यही वजह है कि इन तीन असुरों को त्रिपुरासुर कहा जाता था। तीनों भाइयों ने देवताओं को सताना शुरू कर दिया। त्रिपुरासुर के सताने से सभी देवता परेशान हो गए। त्रिपुरासुर का वध करने के लिए किसी में भी इतनी शक्तियां नहीं थी। तब भगवान शिवजी आगे आए।
Lord Shiva also worshiped son Ganesha before the war
देवताओं ने अपनी आधी शक्ति भगवान शिव को समर्पित कर दी। इसके बाद सभी देवताओं ने मिलकर संहार की सारी लीला रची। महादेव ने उस असुर नगर को देखा। भगवान शिव ने सभी जतन कर लिए, लेकिन उन असुरों का वध करने में असफल रहे।
Lord Shiva also worshiped son Ganesha before the war
तब नारदजी ने भगवान शिव को कहा कि आप गणेशजी की पूजा किए बगैर युद्ध करने चले आए, इसलिए आप युद्ध में विजय प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। तब शिवजी ने अपने पुत्र गणेश की पूजा की और लड्डुओं का भोग लगाया। अंत में भगवान शिव त्रिपुरासुर का वध करने में सफल हो गए।
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