90 percent of the country’s population does not even have money to meet their basic needs: भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में पांचवें स्थान पर है और सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है।
लेकिन इसके बावजूद आम लोगों के जीवन में ज्यादा बदलाव नहीं आया है।
हाल ही में जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि देश की 90 फीसदी आबादी के पास अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी पैसा नहीं है।
आर्थिक असमानता बढ़ी
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की शीर्ष 10 फीसदी आबादी के पास देश की कुल संपत्ति का बड़ा हिस्सा है।
करीब 13-14 करोड़ लोगों के पास अपनी जरूरतों से ज्यादा खर्च करने की क्षमता है, जबकि बाकी 90 फीसदी लोग सिर्फ जरूरी चीजों में ही उलझे रहते हैं।
खर्च करने की क्षमता घटी
अध्ययन में बताया गया है कि हाल के दिनों में लोगों की खर्च करने की क्षमता तेजी से घटी है।
इसकी वजह वित्तीय बचत में गिरावट और कर्ज में बढ़ोतरी है। यही वजह है कि अब कंपनियां बड़े पैमाने पर उत्पादों की जगह महंगे और प्रीमियम उत्पादों पर ध्यान दे रही हैं।
रियल एस्टेट में बड़ा बदलाव
रिपोर्ट में रियल एस्टेट सेक्टर में भी बदलाव की बात कही गई है। अब किफायती मकानों की हिस्सेदारी घटकर 18 फीसदी रह गई है,
जो पांच साल पहले 40 फीसदी थी।
टैक्स में छूट से राहत
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में 12 लाख रुपये तक की आय वालों को टैक्स में पूरी छूट दी है।
इससे करीब 92 फीसदी वेतनभोगी लोग टैक्स के दायरे से बाहर हो जाएंगे, जिससे उनकी खर्च करने की क्षमता बढ़ सकती है।
चीन से पीछे है भारत
रिपोर्ट के अनुसार, खपत के मामले में भारत अपने पड़ोसी देश चीन से करीब 13 साल पीछे है।
हालांकि हाल के दिनों में भारत की खपत दर बढ़ी है, लेकिन अभी भी चीन से काफी पीछे है।