मुंबई: महामारी के इस दौर में कई कलाकारों के हाथ से काम चला गया और उनके जीवन में कठिनाइयां बढ़ गईं हैं।
ऐसी ही एक वरिष्ठ अभिनेत्री हैं सुनीता शिरोले। वह पहले से ही कई समस्याओं से जूझ रही थीं और कोरोना महामारी ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है।
बुढ़ापे के साथ ही अभिनेत्री को कई शारीरिक समस्याएं भी हो गईं हैं। इसके बाद महामारी आने के बाद बचे इक्का-दुक्का काम भी हाथ से निकल गए।
लॉकडाउन के बीच वह कई बार बीमार पड़ी और अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इसमें उनकी सारी जमा-पूंजी खर्च हो गई।
अब उनके सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है जिसकी वजह से उन्होंने मदद की गुहार लगाई है।
सुनीता शिरोले ने बताया कि मैं तब तक काम कर रही थी, जब तक महामारी नहीं आ गई। इस दौरान जीवित रहने के लिए मैंने अपनी सारी बचत का उपयोग किया।
दुर्भाग्य से मुझे उसी समय किडनी में संक्रमण हो गया और घुटने में दर्द भी बढ़ गया, जिसकी वजह से अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।
मेरे कष्ट यहीं खत्म नहीं हुए, मैं अस्पताल में दो बार गिर गई और मेरा बायां पैर टूट गया। अब मैं अपना पैर मोड़ नहीं सकती। मेरी पहले भी एंजियोप्लास्टी हो चुकी है और मैं दूसरी बीमारियों से भी जूझ रही हूं।
सुनीता शिरोले, इस समय नुपुर अलंकार के घर में रह रही हैं। सुनीता शिरोले ने कहा कि मैं एक फ्लैट में पेइंग गेस्ट के रूप में रह रही थी, लेकिन मैं तीन महीने तक भुगतान नहीं कर सकी, क्योंकि मेरे पास बिल्कुल पैसे नहीं बचे थे।
नूपुर को मेरी मदद के लिए भेजने के लिए मैं सिन्टा (सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन) की आभारी हूं। नूपुर मुझे फिलहाल अपने घर ले आई हैं और उन्होने मेरे लिए एक नर्स भी हायर की है।
अब मैं काम शुरू करना चाहती हूं क्योंकि मुझे पैसे की जरूरत है, लेकिन मेरे पैर की हालत बिगड़ रही है और मुझे नहीं पता कि मैं फिर चल भी पाऊंगी या नहीं। जब तक मैं अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो जाती, तब तक मुझे आर्थिक मदद की जरूरत है।
अपने अतीत को याद करते हुए सुनीता शिरोले ने कहा मैंने अपने सुनहरे दिनों में बहुत कुछ कमाया है और जरूरतमंदों की मदद भी की।
मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं अपने जीवन में इस चौराहे आ खड़ी होऊंगी। मैंने अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा अपने के पति के व्यवसाय में निवेश किया था। गोदाम में आग लगने से वह सब खो दिया। 2003 में पति का भी निधन हो गया। आज मैं लोगों के रहमो-करम पर जिंदा हूं। जीवित रहना बहुत कठिन है।
मुझे इस बात का अफसोस है कि मैंने बुरे दिनों का सोच कर कभी पैसे नहीं बचाए और मुंबई में अपना घर तक नहीं बनाया।
85 वर्षीय सुनीता शिरोले ने ‘शापित’, ‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’, ‘बजरंगी भाईजान’ और मेड इन चाइना, किस देश में है मेरा दिल, ‘मिसेज कौशिक की पांच बहुएं जैसी अनेक फिल्मों में काम किया है।