INX Media Deal : ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ CBI की याचिका पर फैसला सुरक्षित

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नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया डील मामले में जांच के दौरान दर्ज बयानों और दस्तावेजों की प्रति आरोपितों को देने के ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।

जस्टिस मुक्ता गुप्ता की बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

पिछली 9 अगस्त को कोर्ट ने सीबीआई से कहा था कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि जब चार्जशीट दाखिल की जाती है, उसके बाद जांच एजेंसी उन सभी दस्तावेजों की सूची बनाएगी, जिन पर वह भरोसा करती है।

अगर आरोपित चाहे तो आवेदन देकर उन दस्तावेजों का परीक्षण कर सकता है। उसके बाद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को पढ़ने के लिए समय देने की मांग की।

पिछली 18 मई को सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से वकील अनुपम एस शर्मा और प्रकर्ष ऐरन ने पिछली 5 मार्च को स्पेशल सीबीआई जज एमके नागपाल के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी।

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उन्होंने कहा था कि ट्रायल कोर्ट ने अपने क्षेत्राधिकार का उल्लंघन किया और सीबीआई को निर्देश दिया था कि वो जांच के दौरान मिले सभी दस्तावेजों और बयानों को कोर्ट में पेश करे और उनकी प्रति आरोपितों को दे।

उन्होंने कहा था कि कोर्ट ने ये भी जानने की कोशिश नहीं की कि सीबीआई उन दस्तावेजों को आधार बना रही है कि नहीं।

उन्होंने कहा था कि अपराध प्रक्रिया संहिता में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि कोर्ट जांच एजेंसी को निर्देश दे कि वो उन दस्तावेजों को सौंपने का निर्देश दे, जिस पर वो भरोसा नहीं कर रही है।

पिछली 24 मार्च को कोर्ट ने ईडी की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था।

कोर्ट ने मनी लांड्रिंग एक्ट की धारा 3 और 70 के तहत दायर चार्जशीट पर संज्ञान लिया था।

इस मामले में सीबीआई ने 15 मई 2017 को एफआईआर दर्ज की थी। उसके बाद ईडी ने 18 मई 2017 को एफआईआर दर्ज की।

सीबीआई ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 420 और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 8, 12(2) और 13(1)(डी) के तहत आरोप लगाए हैं।

ये एफआईआर आईएनएक्स मीडिया की निदेशक इंद्राणी मुखर्जी और चीफ आपरेटिंग अफसर पीटर मुखर्जी की शिकायत पर दर्ज की गई थीं।

कार्ति चिदंबरम पर आरोप है कि उसने फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रोमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) से अनुमति दिलवाने के लिए आईएनएक्स मीडिया से पैसे वसूले थे।

इस मामले में जिन लोगों को आरोपित बनाया गया है उनमें पी चिदंबरम, कार्ति चिदंबरम, सुब्रमण्यम भास्करन, मेसर्स एडवांटेज स्ट्रेटैजिक कंसल्टिंग सिंगापुर लिमिटेड, आईएनएक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड एडवांटेज इस्ट्रेटेजिया इस्पोर्टिवा एसएलयू, मेसर्स क्रिया एफएमसीजी डिस्ट्रिब्युटर्स प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स नॉर्थ स्टार सॉफ्टवेयर साल्युशंस प्राइवेट लिमिटेड कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

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