तमिलनाडु में दही पर विवाद छिड़ने के बाद अब कर्नाटक में अमूल और नंदिनी को लेकर गरमाई राजनीति

बताया गया कि यह डेयरी हर दिन 10 लाख लीटर दूध प्रोसेस (Milk Process) करेगी और बाद में इसकी क्षमता बढ़ाकर 14 लाख लीटर प्रतिदिन कर दी जाएगी।

News Aroma Media
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Amul vs Nandini : तमिलनाडु (Tamil Nadu) में दही पर विवाद छिड़ने के बाद अब चुनावी राज्य कर्नाटक में मिल्क ब्रैंड (Milk Brand) अमूल (Amul) और नंदिनी (Nandini) को लेकर राजनीति गरमा गई है।

कांग्रेस ने गुजरात की अमूल कंपनी को प्रदेश में एंट्री देने को BJP की साजिश करार दिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष DK शिवकुमार ने कहा कि अकेले कांग्रेस (Congress) ही नहीं अन्य पार्टियां भी इस फैसले का विरोध कर रही हैं।

तमिलनाडु में दही पर विवाद छिड़ने के बाद अब कर्नाटक में अमूल और नंदिनी को लेकर गरमाई राजनीति After the controversy over yogurt in Tamil Nadu, now the politics of Amul and Nandini in Karnataka

‘कांग्रेस सहित अन्य पार्टियां भी कर रही विरोध’

सरकार ने यह कदम उठाकर किसानों की मदद करने की कोशिश नहीं की है। उन्होंने कहा कि नंदिनी अमूल से एक बेहतर Brand है।

उन्होंने कहा- हम चाहते हैं कि हमारे अधिकार, हमारी जमीन, हमारी मिट्टी, हमारा पानी और हमारा दूध सुरक्षित रहे।

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मेरे किसानों को अच्छी कीमत मिलनी चाहिए। नंदिनी हमारी शान है। हमारे लोग वे Nandini से प्यार करते हैं।

उन्होंने कहा- हमें गुजरात मॉडल (Gujarat Model) नहीं चाहिए। हमारे पास कर्नाटक मॉडल है।

तमिलनाडु में दही पर विवाद छिड़ने के बाद अब कर्नाटक में अमूल और नंदिनी को लेकर गरमाई राजनीति After the controversy over yogurt in Tamil Nadu, now the politics of Amul and Nandini in Karnataka हर राज्य की अपनी अलग संस्कृति और परंपरा होती है। हमें अपने किसानों की रक्षा करने की जरूरत है।

सिद्धारमैया ने PM मोदी और शाह पर लगाया आरोप

वहीं कांग्रेस नेता सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने आरोप लगाते हुए कहा, “PM नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह Nandini Brand को बंद कराना चाहते हैं, जो कर्नाटक के किसानों की जीवन रेखा है।

राज्य पर Amul Brand थोपा जा रहा है। कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्धारमैया ने लोगों से अमूल उत्पादों का बहिष्कार करने का भी आग्रह किया था।

अमूल का यह बहिष्कार सोशल मीडिया पर भी शुरू हो गया है। ट्विटर पर शनिवार को #GoBackAmul और #SaveNandini ट्रेंड करने लगा।

वहीं कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक के पार्टी प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया, कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (Karnataka Milk Federation) को गुजरात की अमूल को बेचने की BJP की साजिश अब साफ हो गई है।तमिलनाडु में दही पर विवाद छिड़ने के बाद अब कर्नाटक में अमूल और नंदिनी को लेकर गरमाई राजनीति After the controversy over yogurt in Tamil Nadu, now the politics of Amul and Nandini in Karnataka

इस मामले में सरकार का क्या है रुख

कर्नाटक CM बसवराज बोम्मई (Basavaraj Bommai) ने इस मामले में कहा है कि Amul Brand को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है।

हम Nandini Brand को देश में नंबर वन बनाने के लिए उसे और भी ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाएंगे। विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री के. सुधाकर का कहना है- राज्य में नंदिनी के अलावा करीब 18 ब्रांड लंबे समय से बेचे जा रहे हैं।

क्या अमूल BJP का ब्रांड है और नंदिनी कांग्रेस का ब्रांड है? कांग्रेस ने अमूल दूध (Amul Milk) और अन्य उत्पादों की बिक्री के खिलाफ राज्य में एक अभियान शुरू किया है।तमिलनाडु में दही पर विवाद छिड़ने के बाद अब कर्नाटक में अमूल और नंदिनी को लेकर गरमाई राजनीति After the controversy over yogurt in Tamil Nadu, now the politics of Amul and Nandini in Karnataka

कैसे शुरू हुआ विवाद

केंद्रीय मंत्री अमित शाह (Amit Shah) 30 दिसंबर को कर्नाटक के मांड्या जिले में थे। यहां उन्होंने 260 करोड़ की लागत से बनी एक डेयरी (Dairy) का उद्घाटन किया था।

बताया गया कि यह डेयरी हर दिन 10 लाख लीटर दूध प्रोसेस (Milk Process) करेगी और बाद में इसकी क्षमता बढ़ाकर 14 लाख लीटर प्रतिदिन कर दी जाएगी।

तब उन्होंने कहा था कि अमूल और नंदिनी मिलकर कर्नाटक के हर गांव में प्राइमरी डेयरी स्थापित करने की दिशा में काम करेंगे और 3 साल में कर्नाटक में एक भी ऐसा गांव नहीं होगा, जहां प्राइमरी डेयरी (Primary Dairy) नहीं होगी।

इसके के बाद से यह मुद्दा गरमा गया था। BJP पर Nandini Brand को खत्म करने के आरोप लगने लगे।

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दही को लेकर यह था विवाद

तमिलनाडु में कन्नड भाषा में दही को मोसारू (Mosaru) और तमिल में तयैर (Tayiar) कहा जाता है।

दही के कप पर यही नाम लिखे जाते थे लेकिन भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने मार्च में दक्षिण भारत में दही बनाने वाली सहकारी संस्थाओं को आदेश दिया कि वे अब दही के पैकेट पर दही ही लिखेंगे। इसके बाद प्रदेश में राजनीति शुरू हो गई।

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