आंदोलन कर रहे किसानों को दी जा रही है कोरोना से लड़ने की खुराक

News Aroma Media
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चंडीगढ़: बेशक कोरोना को हराने के लिए वैक्सीन नहीं बन पाई है, लेकिन किसानों ने कोरोना से लड़ने की खुराक जरूर तैयार कर ली है।

सिंघु बार्डर पर पिछले 12 दिनों से धरने पर डटे किसानों को रोग प्रतिरोधक बढ़ाने की क्षमता वाली दूध की खुराक दी जा रही है। यह साधारण दूध नहीं है बल्कि इसमें देशी घी से लेकर शहद और सूखे मेवे मिलाए गए हैं।

कृषि कानूनों को निरस्त कराने की मांग को लेकर सिंघु बॉर्डर पर मोर्चाबंदी लगाए बैठे किसानों को सर्द रात्रि की ठिठुरने से बचाने और कोरोना की लड़ाई लड़ने के लिए गरमा-गरम दूध दिया जा रहा है।

पिछले पांच दिनों से करनाल की निर्मल कुटिया की ओर से किसानों को घी व शहद के मिश्रण के साथ सूखे मेवे छोटी इलायची, केसर, बादाम व काजू युक्त दूध दिया जा रहा है। यही नहीं सुबह समय किसानों का नाश्ता भी पौष्टिकता से भरपूर होता है।

सुबह के समय किसानों को लस्सी, मक्की की रोटी और सरसों का साग दिया जा रहा है। दोपहर के समय आलू-गोभी से लेकर गाजर, मटर तथा कढ़ी-चावल दिए जा रहे हैं। रात्रि में ठंडक को देखते हुए किसानों को मटर-पनीर, छोले व दाल-चावल तथा रोटी दी जा रही हैं।

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निर्मल कुटिया से दूध का लंगर लगा रहे किसान का कहना है कि दूध में किसानों को देसी-घी व शहद मिलाकर दिया जा रहा है, जो कोरोना की लड़ाई सबसे अहम है।

इससे दिनभर की थकान दूर होती है और किसानों में नई स्फूर्ति भी आती है। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश प्रवक्ता राकेश बैंस का कहना है कि धरने पर बैठे किसानों को पौष्टिकता युक्त भोजन दिया जा रहा है।

प्रदेश के हर गांवों से किसानों के खाद्य सामग्री आ रही है। रात्रि की ठंड को देखते हुए किसानों को गरम दूध भी दिया जा रहा है, जिससे किसानों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही है।

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