… और इन नक्सलियों ने इस कंपनी के 8 वाहनों को कर दिया आग के हवाले, फिर…

नक्सलियों ने घटनास्थल पर कई हस्तलिखित पर्चे भी छोड़े हैं, जिसमें बॉक्साइट उत्खनन करने वाले कंपनियां, ठेकेदार, पेटीदार होश में आओ, मशीनीकरण व मनमानी और जंगल पहाड़ से उत्खनन करना बंद करो, माइंस एरिया में आम जनता की मूलभूत समस्या स्वास्थ्य शिक्षा पेयजल खाद बीज इत्यादि समस्या का हल करो, मशीनीकरण बंद करो, बेरोजगारों को रोजगार दो, बॉक्साइट उत्खनन करने वाले कंपनी एवं पेटीदार ठेकेदार को संगठन से संपर्क किए बिना काम नहीं करने की चेतावनी दी गई है।

News Aroma Media
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गुमला : प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) के नक्सलियों ने सोमवार देर रात करीब एक बजे गुमला जिले के घाघरा-सेरेंगदाग पथ पर सतकोनवा गांव में बीकेबी, एमटू एवं डॉल्फिन कंपनी के आवासीय परिसर में खड़े आठ वाहनों को जला दिया।

घटना की सूचना मिलते ही गुमला के पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह, अभियान एसपी मनीष कुमार, सीआरपीएफ के कमांडेंट राहुल कुमार, थाना प्रभारी अमित कुमार चौधरी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पहुंचे और वस्तुस्थिति की जानकारी ली। प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब 6-7 नक्सली सतकोनवा पहुंचे और करीब आधे घंटे तक उत्पात मचाया। इन्होंने रह रहे कंपनी के कर्मचारियों को घरों से बाहर निकाला और उन्हें हथियार के बल पर कब्जे में ले लिया।

नक्सलियों ने आवासीय परिसर में ही खड़े डाल्फिन कंपनी के एक हाईवा को ब्लॉस्ट कर क्षतिग्रस्त कर दिया। साथ ही बीकेबी कम्पनी की तीन हाईवा, एमटू कंपनी की एक हाईवा, डॉल्फिन कंपनी के एक टैंकर, पिकअप वैन तथा एक अन्य हाईवा को डीजल डालकर आग के हवाले कर दिया। इस आगजनी की घटना में करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान है।

नक्सलियों ने घटनास्थल पर कई हस्तलिखित पर्चे भी छोड़े हैं, जिसमें बॉक्साइट उत्खनन करने वाले कंपनियां, ठेकेदार, पेटीदार होश में आओ, मशीनीकरण व मनमानी और जंगल पहाड़ से उत्खनन करना बंद करो, माइंस एरिया में आम जनता की मूलभूत समस्या स्वास्थ्य शिक्षा पेयजल खाद बीज इत्यादि समस्या का हल करो, मशीनीकरण बंद करो, बेरोजगारों को रोजगार दो, बॉक्साइट उत्खनन करने वाले कंपनी एवं पेटीदार ठेकेदार को संगठन से संपर्क किए बिना काम नहीं करने की चेतावनी दी गई है।

बहरहाल, लंबे समय तक गुमला जिले में कोई नक्सली घटना नहीं हुई थी। लोगों को लग रहा था कि उन्हें उग्रवाद से मुक्ति मिल गई है लेकिन इस घटना ने साबित कर दिया है कि जंगल एवं पहाड़ी क्षेत्रों में नक्सलियों की सक्रियता कायम है।

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