अन्नदाता पहली बार सड़क पर, सभी करें समर्थन: रामेश्वर उरांव

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रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर उरांव के निर्देशानुसार पार्टी ने 8 दिसंबर को किसान संगठनों के आह्वान पर भारत बंद को नैतिक समर्थन देते हुए इसे सफल बनाने की दिशा में भी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी के प्रदेश से लेकर प्रखंड और पंचायत स्तर के पदाधिकारियों-कार्यकर्ताओं को सड़क पर उतर कर किसानों के समर्थन में आवाज बुलंद करने का निर्देश दिया है।

डॉ. उरांव ने कहा कि देश में आजादी के बाद यह पहली पहली बार हुआ जब किसान अपनी मांगों को लेकर सड़क पर हैं, जिन अन्नदाताओं ने अब तक पेट भरने का काम किया है, उनके समर्थन में हर वर्ग को आगे आना चाहिए।

पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे, लालकिशोरनाथ शाहदेव और राजेश गुप्ता छोटू ने कहा कि कांग्रेस के साथ-साथ अब भाजपा-संघ के नेता देश के किसानों को भी देशद्रोही होने का सर्टिफिकेट बांटने में जुट गए हैं।

आजादी की लड़ाई में संघ के जिन नेताओं ने अंग्रेजी शासन का साथ दिया, उसी संगठन के नेता अब अपने पूर्वजों के दिखाये रास्ते पर चलकर एक बार फिर से देश को पूंजीपतियों के हाथों बेचने पर तूले हैं।

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दूबे ने कहा कि केंद्र में सत्ता हासिल करने के पहले जिस दल के नेता गला फाड़-फाड़ कर चिलाते थे, उसने एक-एक कर देश की सार्वजनिक संपत्तियों को बेच दिया।

एक रिपोर्ट में भी यह बताया गया है कि देश में सबसे ज्यादा सरकारी संपत्तियां मोदी सरकार के कार्यकाल में बिकी है, हवाईअड्डा, रेल, पेट्रोलियम कंपनी से लेकर कई छोटी-बड़ी सरकारी कंपनियां बिक चुकी है, बैंकों का भी खास्ता हाल है, कोयला और अन्य खनन क्षेत्रों में भी निजीकरण को बढ़ावा देकर इसे पूंजीपतियों के हाथों सौंपने की साजिश रची जा रही हैं।

प्रदेश प्रवक्ता लाल किशोरनाथ शाहदेव ने कहा कि 30 से अधिक अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी किसानों के समर्थन में अपना पदक लौटा रहे है, 12 दिनों से दिल्ली में आंदोलन चल रहा है, लेकिन केंद्र सरकार मौन साधे बैठी है।

केंद्र सरकार और किसानों के प्रतिनिधियों के बीच पांच दौर की बैठक हो चुकी है, दिल्ली के चारों सीमाओं पर किसान डटे हैं। लेकिन केंद्र सरकार उनकी मांगों को मानने के बजाय आंदोलन में ही फूट डालने की कोशिश में जुटी है।

लेकिन किसान अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं है, किसानों के समर्थन में महिलाओं ने खेतों संभाल लिया है, वॉलीबुड से लेकर दुनिया भर के विभिन्न देशों का समर्थन किसानों को मिलने लगा है।

लेकिन भाजपा नेता कभी किसानों को खालिस्तानी, तो कभी पाकिस्तानी , तो कभी विदेशी फंड से पोषित आंदोलन बताकर लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश में जुटे हैं।

प्रदेश प्रवक्ता राजेश गुप्ता छोटू ने कहा कि किसानों के समर्थन में एनडीए में भी दरार साफ दिख रहा है, वर्षां तक एनडीए में शामिल शिरोमणि अकाली दल ने मोदी सरकार का साथ छोड़ दिया है, अकाली दल की हरिमिंदर सिंह कौर ने मंत्रिमंडल से भी त्यागपत्र दे दिया, लेकिन इसके बावजूद पूंजीपतियों के इशारे पर चल रही मोदी सरकार अपनी जिद्द से पीछे हटने को तैयार नहीं है, जिसका खामियाजा पूरे देश को भुगतना पड़ रहा है, किसानों के खेत से 10 रुपये में आलू खरीद कर पूंजीपति और दलाल किस्म के लोग आलू को खुदरा बाजार में 50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेच रहे है।

इस लड़ाई में ऑटो चालक, ट्रक चालक, व्यवसायिक संगठन समेत अन्य संगठनों को भी आगे बढ़चढ़कर किसानों के समर्थन में आगे आना चाहिए।

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