झारखंड विधानसभा बजट सत्र के हंगामेदार होने के आसार, पारा शिक्षक, संविदा कर्मियों और गिरती कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरने की बनायी रणनीति

News Aroma Media
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रांची: झारखंड विधानसभा बजट सत्र के हंगामेदार होने के आसार हैं। शुक्रवार को बजट सत्र शुरू होगा।

विपक्ष ने विकास योजना की धीमी रफ्तार, पारा शिक्षकों और अन्य संविदा कर्मियों के सेवा स्थायीकरण की मांग, गिरती कानून व्यवस्था, बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाये जाने और चालू वित्तीय वर्ष में बजट राशि नहीं खर्च होने के मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की रणनीति बनायी है।

वहीं, सत्तापक्ष ने भी विपक्ष की धार को कमजोर करने की रणनीति बनायी गयी है। हालांकि, सरकार ने पक्ष-विपक्ष के सभी सदस्यों के सवालों का संवेदनशीलता के साथ जवाब देने और समस्या के निराकरण का भरोसा दिलाया है।

पिछले वर्ष बजट सत्र के दौरान ही कोरोना संक्रमण के कारण देशव्यापी पूर्ण तालाबंदी के बीच विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयी थी।

इसके बाद विधानसभा का संक्षिप्त सत्र भी आहूत किया गया और एकदिवसीय सत्र में सरना आदिवासी धर्म कोड को लेकर एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा गया। इस तरह से करीब 11 महीने के बाद शुरू हो रहे ज्वलंत मुद्दों पर सदन में एक बार फिर से जोर-शोर से चर्चा होने की संभावना है।

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भाजपा विधायक मनीष जायसवाल ने हजारीबाग में केरोसिन तेल के उपयोग के द्वारा विस्फोट की घटना के मामले में कार्यस्थगन प्रस्ताव लाने की बात कही है।

वहीं, पार्टी ने गुमला में हुए पांच लोगों की सामूहिक हत्या, राज्य के विभिन्न हिस्सों में महिला उत्पीड़न, हजारीबाग में एलएनटी कंपनी के पदाधिकारी की गोली मारकर हत्या और लूट जैसी घटनाओं में वृद्धि के खिलाफ भी सरकार को घेरने की रणनीति बनायी है।

आजसू पार्टी विधायक लंबोदर महतो ने वर्ष 2020-21 के बजट में आवंटित राशि में से अब तक महज 38 फीसदी खर्च होने का आरोप लगाते हुए सरकार पर पूरी तरह विफल होने का आरोप लगाया है।

इधर, सत्तापक्ष के सदस्यों ने भी जनहित से जुड़े मुद्दों को सदन में जोर-शोर से उठाने का निर्णय किया है।

झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर उरांव के आवास पर पार्टी विधायकों की हुई बैठक में इसे लेकर चर्चा हुई।

इधर महागठबंधन के विधायक दल की सर्वदलीय बैठक गुरुवार को कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास में हुई।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में मंत्री सहित सत्ता पक्ष के लगभग सभी विधायक मौजूद थे।

बैठक के दौरान विधानसभा के बजट सत्र को लेकर चर्चा हुई। साथ ही बजट सत्र सुचारू रूप से चले, इसे लेकर रणनीति भी बनाई गई।

बैठक में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सह वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव, सत्यानंद भोक्ता, आलमगीर आलम, चंपई सोरेन, मिथिलेश ठाकुर, स्टीफन मरांडी और बादल पत्रलेख सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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