आजम खान के आखिरी किला ध्वस्त, स्वार में CM योगी के नेतृत्व में BJP ने सपा प्रत्याशी को हराया

जिसके बाद उन्हें UP विधानसभा से अयोग्य घोषित कर दिया गया था और चुनाव आयोग (Election Commission) ने उनकी सीट को रिक्त घोषित कर उपचुनाव करवाए थे

News Desk
3 Min Read

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनाव (Uttar Pradesh Assembly By-Election) में रामपुर (Rampur) की स्वार टांडा सीट (Swar Tanda Seat) से अपना दल के शफीक अंसारी की जीत हो गई है।

BJP गठबंधन से अपना दल के शफीक अंसारी ने समाजवादी पार्टी (SP) की अनुराधा चौहान को 9734 वोट के अंतर से हरा दिया है।

इस चुनाव (Election) में अपना दल के शफीक को 67434 वोट मिले और अनुराधा को 57710 Vote हासिल हुए। इसी जीत के साथ BJP गठबंधन ने आजम खान का मजबूत किला ध्वस्त कर दिया है।

आजम खान के आखिरी किला ध्वस्त, स्वार में CM योगी के नेतृत्व में BJP ने सपा प्रत्याशी को हराया- Azam Khan's last fort destroyed, BJP under the leadership of CM Yogi defeats SP candidate in Swar

आजम खान ने खेला था हिंदू कार्ड

अपने बेटे की सीट को बचाने के लिए आजम खान की ओर से खेला गया हिंदू कार्ड (Hindu Card) भी उपचुनाव में विफल साबित हुआ। स्वार की जनता ने आजम परिवार को छोड़ इस बार अनुप्रिया पटेल की अपना दल (एस) पार्टी को जिताया।

- Advertisement -
sikkim-ad

बता दें कि अनुप्रिया केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) में वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री हैं। BJP से गठबंधन के बाद स्वार सीट अपना दल (S) के हिस्से में आई थी। इस सीट पर फतह हासिल करके आजम के आखिरी किले को भी ढहा दिया गया है।

आजम खान के आखिरी किला ध्वस्त, स्वार में CM योगी के नेतृत्व में BJP ने सपा प्रत्याशी को हराया- Azam Khan's last fort destroyed, BJP under the leadership of CM Yogi defeats SP candidate in Swar

इस मामले में चली गई थी आजम खान के बेटे की सदस्यता

दरअसल,15 साल पहले 29 जनवरी 2008 को छजलैट पुलिस (Chhajlat Police) ने पूर्व मंत्री आजम खान (Aajam Khan) की कार को चेकिंग के लिए रोका था। तब समाजवादी पार्टी (SP) के कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया था।

इस हंगामे में आजम के बेटे अब्दुल्ला समेत 9 लोगों को आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने इस मामले में हंगामा करने वाले सभी लोगों पर सरकारी काम में बाधा डालने और भीड़ को उकसाने के आरोप में केस दर्ज किया था। मामले में अब्दुल्ला को दो साल की सजा हुई, ऐसे में उनकी विधायकी भी हाथ से फिसल गई।

जिसके बाद उन्हें UP विधानसभा से अयोग्य घोषित कर दिया गया था और चुनाव आयोग (Election Commission) ने उनकी सीट को रिक्त घोषित कर उपचुनाव करवाए थे। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार, अब्दुल्ला अपनी सजा के बाद अगले छह साल तक चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे।

TAGGED:
Share This Article