राज्यपाल से मिलकर भाजपा ने की सचिवालय घेराव कार्यक्रम पर पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच की मांग

कहीं भी कोई तोड़-फोड़, हिंसा नहीं की। ऐसे में पुलिस धौंस, फर्जी मुकदमों, संगीन अपराध की कानूनी धाराओं के आधार पर हेमंत सरकार (Hemant Sarkar) अपने कुकृत्यों पर पर्दा डालना चाहती है

News Update
3 Min Read

रांची: प्रदेश BJP ने राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन (CP Radhakrishnan) से सचिवालय घेराव कार्यक्रम पर पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच (Judicial Investigation) कराने का आग्रह किया है।

इस संबंध में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को राज्यपाल से मिलकर ज्ञापन सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल में पूर्व मुख्यमंत्री और BJP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास, BJP विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी, प्रदेश अध्यक्ष और सांसद दीपक प्रकाश, प्रदेश महामंत्री डॉ प्रदीप वर्मा और बालमुकुंद सहाय शामिल थे।

हजारों BJP कार्यकर्ताओं एवं आम जनता ने दिया धैर्य एवं संयम का परिचय

प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को बताया कि 11 अप्रैल को रांची में पार्टी की ओर से सचिवालय घेराव कार्यक्रम को बाधित करने का काम राज्य सरकार ने किया।

बावजूद इसके प्रदेश BJP की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम पूरी तरह से लोकतांत्रिक रहा। लोकतंत्र में सत्ता की विफलताओं-नाकामियों को उजागर करना विपक्ष का धर्म है।

- Advertisement -
sikkim-ad

इसका पालन लोकतांत्रिक तरीके से BJP ने किया है। कार्यक्रम में शामिल हजारों BJP कार्यकर्ताओं एवं आम जनता ने धैर्य एवं संयम का परिचय दिया।

कहीं भी कोई तोड़-फोड़, हिंसा नहीं की। ऐसे में पुलिस धौंस, फर्जी मुकदमों, संगीन अपराध की कानूनी धाराओं के आधार पर हेमंत सरकार (Hemant Sarkar) अपने कुकृत्यों पर पर्दा डालना चाहती है।

नेताओं ने आग्रह कहा कि 11 अप्रैल को BJP की ओर से आयोजित सचिवालय घेराव कार्यक्रम में हुई पुलिस कार्रवाई, लाठीचार्ज, नेताओं, कार्यकर्ताओं पर हुए फर्जी मुकदमों की न्यायिक जांच कराई जाये। दोषियों पर सख्त कार्रवाई के लिए आवश्यक निर्देश दिए जाए।

राज्य के लिए शर्मनाक स्थिति यह है कि भ्रष्टाचार के मामले में स्वयं मुख्यमंत्री…

प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से कहा कि प्रदेश BJP लगातार हेमंत सरकार की विफलताओं, नाकामियों को उजागर करती रही है।

पार्टी ने राज्य की साढ़े तीन करोड़ जनता की भावनाओं के अनुरूप हेमंत सोरेन के नेतृत्व में चल रही गठबंधन सरकार की जनविरोधी नीतियों, वादा खिलाफी को सड़क से सदन तक लगातार उजागर किया है।

केंद्रीय जांच एजेंसियों (Central Investigative Agencies) के द्वारा राज्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के गंभीर मामले आए दिन उजागर हो रहे हैं।

राज्य के लिए शर्मनाक स्थिति यह है कि भ्रष्टाचार के मामले में स्वयं मुख्यमंत्री, उनके परिजन, सहयोगी के साथ कई वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता भी उजागर हुई है।

राज्य सरकार की नियत में ही खोट है, यह सरकार राज्य का विकास नहीं करना चाहती बल्कि अपने परिजनों और चहेतों को केवल खनिज संसाधनों और राज्य के खजाने को लूटने की छूट देना चाहती है।

Share This Article