बोकारो: दिल्ली रोहिणी कोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में गैंगस्टर की हत्या के बाद देश भर में कोर्ट सुरक्षा की समीक्षा की जा रही है।
इसी कड़ी में टाउन डीएसपी कुलदीप कुमार ने बोकारो व्यवहार न्यायालय में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। कोर्ट परिसर को दो-आठ की सुरक्षा व्यवस्था से लैश की गई है।
कोर्ट परिसर में तैनात दो पुलिस ऑफिसर के साथ आठ सशस्त्र बल की हर चहलकदमी पर पैनी नजर होती है।
कोर्ट परिसर में दाखिल होने वाले हर सख्श को इस सुरक्षा के जांच गहरे से होकर गुजरना होता है।
इसके अलावा कोर्ट परिसर में होने वाली तमाम गतिविधियों व कोर्ट रूम की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
इसके अलावा कोर्ट परिसर से सटे कोर्ट हाजत में अलग से सुरक्षा व्यवस्था की तैनाती की गई है, जो जेल से कोर्ट में पेशी से आने वाले कैदियों की तमाम गतिविधियों पर नजर रखते हैं।
टाउन डीएसपी ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई है। जरूरत महसूस होने पर सुरक्षा व्यवस्था और भी बढ़ाया जा सकता है।
रोहिणी कोर्ट के इस ताजा घटनाक्रम से पहले बोकारो में इस तरह की वारदात हो चुकी है।
बोकारो में कोर्ट परिसर से सटे कोर्ट हाजत को ब्रेक किया जा चुका है साथ ही जेल ब्रेक की घटना भी हो चुकी है इसे देखते हुए बोकारो व्यवहार न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था अहम है।
दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में गैंगस्टर के हत्या में शामिल दो अपराधी वकील के वेशभूषा में आए थे।
इसके बाद यह सवाल खड़ा होना शुरू हुआ कि वकीलों के पास सरकार या स्टेट बार काउंसिल से निर्गत पहचान पत्र होना चाहिए।
ताकि कोर्ट परिसर में तैनात सुरक्षाकर्मी वकीलों के वेश में दाखिल होने वाले अपराधियों की पहचान कर सकें।
इंडियन लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हाईकोर्ट के वरीय अधिवक्ता रंजीत गिरी ने स्टेट बार कौंसिल से बोकारो व्यवहार न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले सभी अधिवक्ताओं को पहचान पत्र देने की मांग की है।