सावधान हो जाएं BSNL के ग्राहक, डेटा चोरी का बढ़ गया है खतरा, अब…

इस ब्रीच के संबंध में BSNL की ओर से कोई प्र‎तिक्रिया नहीं दी गई है लेकिन भारतीय साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In को कथित तौर पर इस हैकिंग घटना के बारे में सूचित किया गया है।

News Aroma Media
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BSNL Customers Beware : टेलीकॉम ऑपरेटर कंपनी BSNL के ग्राहकों के ‎लिए डेटा चोरी (Data Theft) का खतरा मंडरा रहा है। मी‎डिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लाखों BSNL इंटरनेट और Landline Users का चुराकर हैकर्स द्वारा डार्क वेब (Dark Web) पर बेचा जा रहा है।

ET की रिपोर्ट के अनुसार, डार्क वेब पर प्रेल (Perel) नाम के हैकर से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने एक टेलीकॉम कंपनी के यूजर्स, विशेष रूप से भारत में BSNL का फाइबर और Landline Connection Use करने वालों ग्राहकों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने का दावा किया है।

Perel नाम से काम करने वाले इस हैकर ने चुराए गए Deta के एक हिस्से को Dark Web पर उजागर किया है। डेटासेट में E-mail एड्रेस, बिलिंग डिटेल, कॉन्टैक्ट नंबर और BSNL के फाइबर और लैंडलाइन यूजर्स से जुड़े अन्य पर्सनल Deta जैसी संवेदनशील जानकारी शामिल हैं।

ग्राहकों की गोपनीयता और सुरक्षा के लिए खतरा

इसके अलावा, ऐसा कहा जा रहा है कि मोबाइल सर्विस आउटेज रिकॉर्ड, Network Details, कम्प्लीटेड ऑर्डर और ग्राहक जानकारी से समझौता किया गया है। हालां‎कि इस मामले से परिचित ने इस ब्रीच की गंभीरता पर बात करते हुए कहा कि यह ब्रीच BSNL ग्राहकों की गोपनीयता और सुरक्षा के लिए तत्काल खतरा पैदा करता है।

Hacker द्वारा शेयर किए गए डेटा में लगभग 32,000 लाइन्स की जानकारी शामिल है, लेकिन हैकर का दावा है कि उसने सभी Database से लगभग 2.9 मिलियन (29 लाख) लाइन्स का Deta हासिल कर लिया है, जिसमें BSNL ग्राहकों के जिले वाइस डिटेल भी शामिल हैं।

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इस ब्रीच के संबंध में BSNL की ओर से कोई प्र‎तिक्रिया नहीं दी गई है लेकिन भारतीय साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In को कथित तौर पर इस हैकिंग घटना के बारे में सूचित किया गया है।

BSNL और उसके यूजर्स दोनों पर गहरा प्रभाव

वहीं साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट और इंडिया फ्यूचर फाउंडेशन (India Future Foundation) के फाउंडर कनिष्क गौड़ (Founder Kanishk Gaur) ने इस ब्रीच पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के ब्रीच का BSNL और उसके यूजर्स दोनों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

गौड़ ने इस ब्रीच की गंभीरता के बारे में बताते हुए कहा कि यह न केवल ग्राहकों की गोपनीयता को खतरे में डालता है बल्कि उन्हें पहचान की चोरी, वित्तीय धोखाधड़ी और टारगेट फिशिंग (Fraud and Target Phishing) जैसे जोखिमों के लिए भी बताता है।

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