छठ महापर्व का तीसरा दिन: पहला अर्घ्य आज, अस्ताचलगामी सूर्य को दी जाएगी श्रद्धा

चार दिवसीय छठ महापर्व अपने तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका है, जिसे पहला अर्घ्य देने का दिन माना जाता है। यह पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन व्रती दिनभर निर्जला व्रत रखते हैं और शाम के समय तालाब, नदी या जलाशय में जाकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं।

Central Desk
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Chhath Festival Third Day: चार दिवसीय छठ महापर्व अपने तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका है, जिसे पहला अर्घ्य देने का दिन माना जाता है। यह पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन व्रती दिनभर निर्जला व्रत रखते हैं और शाम के समय तालाब, नदी या जलाशय में जाकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं।

सूर्यास्त के साथ पहला अर्घ्य, सूर्योदय के साथ दूसरा

आज सूर्यास्त का समय शाम 06 बजकर 05 मिनट पर है, जब श्रद्धालु जल में खड़े होकर डूबते सूर्य को दूध और जल से अर्घ्य देंगे। इसके बाद, 4 अप्रैल को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही यह महापर्व पूर्ण होगा। उस दिन सूर्योदय सुबह 05 बजकर 38 मिनट पर होगा, जिसके बाद पारण कर व्रत संपन्न किया जाएगा।

छठ ही है, जहां डूबते सूर्य को भी पूजा जाता है

छठ पूजा हिंदू धर्म का एकमात्र पर्व है, जिसमें डूबते सूर्य को भी पूजा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्य इस समय अपनी दूसरी पत्नी प्रत्यूषा के साथ होते हैं, और इसी कारण व्रती उन्हें अर्घ्य अर्पित करते हैं। ऐसा माना जाता है कि अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, तांबे के लोटे में दूध और गंगाजल मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से व्रती को विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।

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