राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द किए जाने पर CM नीतीश की ‘चुप्पी’, क्या है मायने?

ऐसे में एक बार फिर कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या वह एक और राजनीतिक उलटफेर (Political Upheaval) करने का अवसर तलाश रहे हैं?

News Aroma Media
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पटना: Congress के पूर्व सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को मानहानि के एक मामले में दोषी ठहराए जाने और उनकी संसद सदस्यता रद्द किए जाने पर ज्यादातर विपक्ष उनके समर्थन में उतर आया है, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की इस पूरे मामले पर चुप्पी बेहद पेचीदा है।

शुक्रवार को बिहार विधानसभा (Bihar Assembly) में मौजूद नीतीश कुमार ने कांग्रेस सांसद की दोषसिद्धि और सजा पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

दिलचस्प बात यह है कि जनता दल यूनाइटेड ने राहुल गांधी के समर्थन में विधानसभा (Assembly) के अंदर हुए प्रदर्शन से भी खुद को दूर रखा।

जनता दल यूनाइटेड का कोई भी विधायक महागठबंधन के उन राजनीतिक दलों में शामिल नहीं हुआ, जिसमें राजद, कांग्रेस, भाकपा (ML), भाकपा, CPM और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा शामिल थे और विधानसभा में राहुल गांधी की सजा के खिलाफ विरोध कर रहे थे।

राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द किए जाने पर CM नीतीश की चुप्पीन, क्या है मायने? CM Nitish's silence on the cancellation of Rahul Gandhi's Parliament membership, what is the significance?

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BJP पर हमलावर नहीं हुए नीतीश ?

राहुल गांधी की सजा और उनकी लोकसभा सदस्यता समाप्त (Lok Sabha Membership Expired) करने के मुद्दे पर BJP पर हमला करने में नीतीश कुमार विपक्षी समूह में शामिल होने से क्यों कतरा रहे हैं?

ऐसे में एक बार फिर कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या वह एक और राजनीतिक उलटफेर (Political Upheaval) करने का अवसर तलाश रहे हैं?

राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द किए जाने पर CM नीतीश की चुप्पीन, क्या है मायने? CM Nitish's silence on the cancellation of Rahul Gandhi's Parliament membership, what is the significance?

तेजस्वी ने राहुल गांधी का किया समर्थन

यह कहा जा सकता है कि ये बिहार के मुख्यमंत्री और उनके डिप्टी तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के किसी मुद्दे पर एकमत न होना का दूसरा मामला है।

क्योंकि तेजस्वी पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष के समर्थन में रहे और उन्होंने कहा, “चक्रव्यूह रच विपक्षी नेताओं पर ED,IT, CBI से दबिश करवाओ।

फिर भी बात ना बने तो घिनौने षडयंत्र के अंतर्गत विभिन्न शहरों में आधारहीन मुकदमे करवाओ ताकि हैडलाइन मैनेजमेंट (Headline Management) में कोई कोर कसर ना रह जाए।

यह संविधान, लोकतंत्र, राजनीति और देश के लिए अतिगंभीर चिंता का विषय है।

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