रिम्स में भर्ती मरीज में जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि, वायरल फीवर का बढ़ा खतरा

News Aroma Media
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रांची: रांची के रिम्स में 122 मरीजों का इलाज चल रहा है। रिम्स के मेडिसिन वार्ड में भर्ती एक मरीज में सोमवार को जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई है।

मरीज का इलाज मेडिसिन के यूनिट इंचार्ज डॉ. संजय सिंह के यूनिट में चल रहा है। जानकारी के अनुसार मरीज चार दिन पहले तेज बुखार, सर्दी, कंपकंपी और सांस लेने में परेशानी की शिकायत के बाद अस्पताल भर्ती हुआ था।

रिम्स में दो दिन में बुखार नियंत्रण नहीं होने पर मरीज की मलेरिया, डेंगू समेत कई वायरल इन्फेक्शन की जांच कराई गई, लेकिन किसी संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई। बाद में जापानी इंसेफेलाइटिस की जांच कराई गई और सोमवार को मरीज में इसकी पुष्टि हो गई।

लंबे समय बाद जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई है। पिछले करीब डेढ़ माह से वायरल इंफेक्शन तेजी से फैल रहा है।

उन्होंने आशंका जताई है कि यह जापानी इंसेफेलाइटिस भी हो सकता है। ऐसे में कोविड 19 टेस्ट के साथ-साथ इसकी जांच भी 100% जरूरी की जाए।

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मरीज की स्थिति बिगड़ता देख जापानी इंसेफलाइटिस की जांच करायी गई थी

पुष्टि होने के बाद संजय सिंह की यूनिट में ही उसका इलाज चल रहा है। करीब सात दिन पहले मरीज को तेज बुखार और वायरल की शिकायत के बाद रिम्स लाया गया था।

पांच दिनों तक कई तरह की जांच में बीमारी पकड़ में नहीं आयी। इसके बाद डॉक्टरों ने जापानी इंसेफलाइटिस का टेस्ट काराया, जिसमें रिपोर्ट पॉजिटिव मिली है।

बुखार नियंत्रित नहीं होने के बाद मरीज की मलेरिया, डेंगू समेत कई वायरल इन्फेक्शन की जांच करायी गई, लेकिन किसी संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई। मरीज की स्थिति बिगड़ता देख जापानी इंसेफलाइटिस की जांच करायी गई थी।

संक्रामक नहीं है जापानी इंसेफेलाइटिस

जापानी इंसेफेलाटिस ऐसी बीमारी है, जो मच्छरों के काटने से फैलता है। ये मच्छर फ्लेविवायरस संक्रमित होते हैं।

आमतौर पर यह गंदगी और सुअर वाले इलाके में रहने वालों में भी होता है। यह संक्रामक बुखार नहीं है।

यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है। विशेषज्ञों की मानें तो जापान इंसेफेलाटिस पूर्वांचल भारत में अधिक होता है। इसका पता मच्छर के काटने के 5 से 15 दिनों में दिखाई देता है।

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