कांग्रेस ने जयपाल सिंह मुंडा की 118वीं जयंती पर किया याद

News Aroma Media
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रांची: झारखण्ड कांग्रेस के तत्वावधान में रविवार को पार्टी कार्यालय में मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की 118वीं जयंती मनाई गई। कांग्रेसजनों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया।

मौके पर वक्ताओं ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए जयपाल सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।

वक्ताओं ने कहा कि स्व जयपाल सिंह मुंडा दृढ़ इच्छाशक्ति वाले एवं कुशल वक्ता व नेतृत्वकर्ता थे।

वे आजाद भारत में संविधान निर्माण के लिए गठित संविधानसभा के सदस्य थे एवं उन्होंने आदिवासी, दलितों एवं पिछड़ों की वकालत जीवनपर्यंत करते रहे। वो एक महान हाॅकी खिलाड़ी भी थे।

अपने बुलंद इरादों एवं दृढ़ इच्छा शक्ति के कारण ही उन्होंने खेल के मैदान से लेकर राजनीति में अपनी अमिट छाप छोड़ी है।

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वक्ताओं ने कहा कि बतौर कप्तान उनके नेतृत्व में ही 1928 में भारत पहली बार हाॅकी में ओलिंपिक चैंपियन बना था।

मरांग गोमके जयपाल सिंह के द्वारा आरम्भ किये गए आंदोलन के कारण ही अलग झारखण्ड की मांग बलवती हुई, जो अंततः अलग राज्य के रूप में परिणत हुआ।

इधर प्रोफेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष आदित्य विक्रम जयसवाल ने जयपाल सिंह मुंडा की जयंती के अवसर पर स्थानीय जयपाल सिंह मैदान स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पण किया।

जायसवाल ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा एक महान शख्सियत थे।

जयपाल सिंह मुंडा भारतीय आदिवासियों और झारखंड आंदोलन के एक सर्वोच्च नेता थे।

वे एक जाने माने राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखक, संपादक, शिक्षाविद् और 1925 में ‘ऑक्सफोर्ड ब्लू’ का खिताब पाने वाले हॉकी के एकमात्र अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी थे।

जायसवाल ने कहा कि आज जयपाल सिंह मुंडा की कृतियों ,स्मृतियों एवं उनके व्यक्तित्व को संजोग कर रखने की जरूरत है।

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