Jharkhand: झारखंड में आदिवासी समाज का प्रमुख पर्व सरहुल पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व प्रकृति की आराधना और नई फसल के स्वागत का प्रतीक है। सोमवार को उपवास और जलरखाई पूजा के साथ इसकी शुरुआत हुई। इसके बाद केकड़ा और मछली पकड़ने की परंपरा निभाई गई। आज राजधानी रांची समेत पूरे राज्य में भव्य शोभायात्रा निकाली जा रही है।
रांची में आज भव्य शोभायात्रा
राजधानी रांची में मंगलवार को सरहुल की पहली शोभायात्रा हातमा से निकलेगी। इसके बाद शहर के अलग-अलग इलाकों से सरना समितियां पारंपरिक शोभायात्रा निकालेंगी। सभी शोभायात्राएं सिरमटोली स्थित केंद्रीय सरना स्थल पर पहुंचेंगी, जहां परिक्रमा के बाद श्रद्धालु अपने-अपने इलाकों में लौट जाएंगे।
सरहुल की पारंपरिक रस्में पूरी की गईं
पर्व की शुरुआत के दौरान हातमा तालाब से मछली और केकड़ा पकड़ा गया। इस परंपरा के तहत केकड़े को रसोईघर में चूल्हे के ऊपर टांगा जाता है। कुछ महीने बाद जब खेतों में हल चलाए जाते हैं, तो इस केकड़े का चूर्ण बनाकर फसलों की अच्छी पैदावार के लिए खेतों में छिड़का जाता है।
बारिश की भविष्यवाणी के लिए जलरखाई पूजा
सरहुल के पहले दिन सोमवार को लोगों ने उपवास रखा और अच्छी बारिश व फसल के लिए प्रकृति की पूजा की। देर शाम हातमा स्थित सरना स्थल में जलरखाई पूजा संपन्न हुई। इस अनुष्ठान के लिए तालाब से लाया गया पानी एक नए घड़े में भरा गया। आज इस घड़े में पानी के हलचल से बारिश की भविष्यवाणी की जाएगी।
विद्यार्थियों की भागीदारी और महिलाओं की विशेष पूजा
सरहुल पर्व के दौरान बड़ी संख्या में विद्यार्थी भी पूजा में शामिल हुए। जगलाल पाहन ने विद्यार्थियों द्वारा लाए गए घड़ों में भी पूजा कर पवित्र जल भरा। सिरमटोली के सरना स्थल पर सुबह विशेष पूजा का आयोजन हुआ, जिसमें महिलाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी रही। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जल अर्पित कर प्रकृति के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।