झारखंड : कोरोना के रफ्तार से प्रभावित हुई ट्रेनों की सफर, एक्सप्रेसों में खाली जा रही करंट सीट की बुकिंग

News Aroma Media
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धनबाद :कोरोना ने रफ्तार पकड़ ली है। इसका सीधा असर ट्रेनों पर पड़ रहा है।

बंगाल और झारखंड के ट्रेनों से बड़े महानगरों की तरफ रुख करने से परहेज कर रहे हैं लोग। कोरोना के मामले बढ़ते ही ट्रेनों में यात्रियों के सफर का ग्राफ अचानक से गिर गया है।

रविवार को सियालदह-बीकानेर दूरंतो की करंट बुकिंग में 631 सीट खाली थीं। इसी तरह सियालदह-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस में 178 सीट आज का आरक्षण में उपलब्ध थी।

10 दिसंबर की दोपहर धनबाद पहुंचने वाली हावड़ा-बीकानेर एक्सप्रेस में 496 सीट बुकिंग के लिए खाली बताई जा रही है।

आमतौर पर सालों भर व्यस्त रहने वाली दिल्ली की ट्रेनों पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है। राजधानी और दूरंतो जैसी प्रीमियम ट्रेनों में चलने वालों की संख्या काफी हद तक कम हो गई है। अन्य सुपरफास्ट ट्रेनों के एसी श्रेणी में बुकिंग की स्थिति भी ठीक नहीं है।

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धनबाद से कोटा कम होने के कारण भले ही ट्रेनों में वेटिंग है, लेकिन बंगाल के स्टेशनों खासकर हावड़ा और सियालदह से एसी क्लास में सीट उपलब्ध हैं।

यात्री चाहें तो बंगाल से सीटों की बुकिंग करा कर धनबाद स्टेशन पर बोर्डिंग करा सकते हैं। ऐसे भी बंगाल के कोटे से धनबाद के यात्रियों की वेटिंग टिकट कंफर्म हो रही है।

होली को लेकर अनिश्चितता

पूर्व के वर्षों के भांति ट्रेनों में होली के दौरान भीड़ नजर नहीं आ रही है। 20 दिन पहले जहां होली के एक सप्ताह पूर्व तक सभी ट्रेनों के सभी श्रेणियों में भीड़ नजर आ रही थी, वहीं अभी एसी क्लास में होली से पहले ज्यादातर ट्रेनों में सीट खाली हैं।

दिल्ली, मुंबई, गुजरात और राजस्थान की ट्रेनों में होली पर उमड़ने वाली भीड़ इस बार नजर नहीं आ रही है। कोरोना के मामले घटने के बाद ही ट्रेनों में होली के दौरान भीड़ बढ़ने की संभावना हैं।

श्रमिक और नौकरीपेशा करने वाले लोगों में धैर्य

कोरोना के इस लहर में लोग दूसरे राज्यों में रहने वाले श्रमिक और नौकरीपेशा लोग धैर्य बनाए हुए हैं। कोरोना की पिछली दो लहर की तरह इस बार ट्रेनों में अपने घर लौटने की होड़ अभी तक शुरू नहीं हुई है।

धनबाद लौटने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में सीट की उपलब्धता से स्पष्ट है कि इस बार बड़े महानगरों में संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच लोग अपने काम-काज वाले स्थान को छोड़ने को तैयार नहीं हैं। स्लीपर क्लास को छोड़ बाकी सभी श्रेणियों में आसानी से सीट मिल जा रही हैं।

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