कार्ति चिदंबरम को दस साल की वैधता वाला पासपोर्ट जारी करने के निर्देश

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चेन्नई: मद्रास उच्च न्यायालय ने चेन्नई स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट प्राधिकरण (आरपीए) को शिवगंगा से कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को दस साल की वैधता वाला पासपोर्ट जारी करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति एम गोविंदराज ने हाल ही में कार्ति की एक रिट याचिका को स्वीकार करते हुए यह निर्देश जारी किया।

याचिका में आरपीए के आठ अप्रैल और 24 अगस्त 2021 के आदेशों को रद्द करने की मांग की गई थी, जिनके तहत उन्हें अतिरिक्त पृष्ठों के साथ दस साल की अवधि के लिए वैध पासपोर्ट दोबारा जारी की मांग खारिज कर दी गई थी।

दरअसल, जब मूल रूप से पांच मार्च 2024 तक वैध कार्ति के पासपोर्ट के पृष्ठ समाप्त हो गए थे, तब उन्होंने एक अतिरिक्त पासपोर्ट बुकलेट जारी करने के लिए आवेदन किया था।

हालांकि, आरपीए ने दो आदेश जारी से इन आवेदनों को खारिज कर दिया था। प्राधिकरण ने इसकी जगह चार मार्च 2022 तक वैध पासपोर्ट भी जारी किया था।

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आरपीए ने अपनी कार्रवाई के समर्थन में तर्क दिया था कि अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के नए नियमों के अनुसार, पासपोर्ट की वैधता को मैन्युअल रूप से नहीं बढ़ाया जा सकता है।

उसने कहा था कि नए पासपोर्ट की वैधता पुराने पासपोर्ट की वैधता पर विचार किए बिना स्वतंत्र रूप से निर्धारित की जानी चाहिए।

25 अगस्त 1993 की एक अधिसूचना में पठित पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 6 (2) (एफ) के आधार पर आरपीए ने कहा था कि जब कोई आपराधिक मामला लंबित है तो अधिसूचना लागू होती रहेगी और अधिनियम के तहत अधिकारियों को पासपोर्ट की वैधता को घटाकर एक वर्ष करने के अधिकार हासिल हैं।

याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पी विल्सन ने तर्क दिया कि आरपीए पासपोर्ट अधिनियम की धारा 7 और 10 के आदेशों का पालन किए बिना पासपोर्ट की अवधि या वैधता को कम नहीं कर सकता है।

उन्होंने कहा कि कार्ति एक सांसद हैं और उन्होंने उन पर लागू किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है।

विल्सन ने दावा किया कि आरपीए ने यह साबित करने के लिए कोई सामग्री पेश नहीं की है कि उसे कार्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

विल्सन ने कहा कि इस सूरत में अधिनियम की धारा 7 या 10 को ध्यान में रखे बिना अधिकारों का प्रयोग जारी नहीं रखा जा सकता है।

उच्च न्यायालय ने कार्ति की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि आरपीए अधिनियम की धारा 7 और 10 के आदेशों का पालन किए बिना पासपोर्ट की अवधि या वैधता को कम नहीं कर सकता है।

अदालत ने यह भी कहा कि आरपीए द्वारा यह साबित करने के लिए कोई सामग्री नहीं पेश की गई थी कि कार्ति ने उन पर लागू किसी भी शर्त का उल्लंघन किया है।

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