Washington News: डोनाल्ड ट्रंप की नई H1B वीजा पॉलिसी से दुनिया भर में हड़कंप मच गया है। ट्रंप ने नए H1B वीजा के लिए 1 लाख डॉलर (करीब 84 लाख रुपये) की फीस का ऐलान किया है। इससे खासकर टेक्नोलॉजी सेक्टर में चिंता की लहर दौड़ गई। शुरुआत में लग रहा था कि सभी H1B होल्डर्स को ये भारी फीस चुकानी पड़ेगी, लेकिन व्हाइट हाउस ने क्लियर किया कि मौजूदा वीजा वालों पर ये लागू नहीं होगा।
अब एक फ्रेश अपडेट आया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में व्हाइट हाउस स्पोक्सपर्सन टेलर रोजर्स के ईमेल का जिक्र है। इसमें कहा गया कि नई पॉलिसी में डॉक्टर्स और मेडिकल रेजिडेंट्स के लिए पॉसिबल एक्जेम्प्शन हो सकता है। ट्रंप ने खुद कहा है कि कंपनियां H1B का गलत इस्तेमाल करके सैलरी को दबाती हैं, और ये नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा है।
ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी और बढ़ेगी
अमेरिकी डॉक्टर्स कम्युनिटी में ये फीस एक बड़ा मुद्दा बन गई है। इंटरनेशनल मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए अमेरिका आने का रास्ता मुश्किल हो जाएगा। अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (AMA) के प्रेसिडेंट बॉबी मुक्कमाला, जो मिशिगन के हेड एंड नेक सर्जन हैं, ने ब्लूमबर्ग से कहा, “ये 1 लाख डॉलर की फीस हाईली ट्रेंड डॉक्टर्स के दरवाजे बंद कर देगी। खासकर रूरल एरियाज में प्रॉब्लम बढ़ेगी, जहां पहले से ही डॉक्टर्स की शॉर्टेज है।”
हेल्थकेयर एम्प्लॉयर्स अक्सर मेडिकल रेजिडेंट्स और दूसरे डॉक्टर्स के लिए H1B वीजा स्पॉन्सर करते हैं। हेल्थ रिसर्च ग्रुप KFF के डेटा से पता चलता है कि 76 मिलियन से ज्यादा अमेरिकी ऐसे एरियाज में रहते हैं जहां प्राइमरी केयर डॉक्टर्स की भारी कमी है। चिल्ड्रेंस रिसर्च हॉस्पिटल जैसे टॉप स्पॉन्सर्स हैं, और मेयो क्लिनिक के पास 300 से ज्यादा H1B वीजा हैं। अगर फीस बढ़ी, तो हॉस्पिटल्स पर कॉस्ट का बोझ बढ़ेगा, जो पेशेंट्स को भी प्रभावित करेगा।




