New Delhi : अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा आयातित वाहनों पर ऊंचे टैरिफ लगाने के बाद से वैश्विक ऑटोमोबाइल उद्योग पहले से ही मुश्किल दौर के लिए तैयार हो रहा है। अब यूरोप आई एक नई खबर ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। यूरोपीय संघ (ईयू) ने ऑटोमोबाइल उद्योग में एक बड़ा घोटाला उजागर किया है।
यूरोपीय संघ ने लगाया 4237.62 करोड़ रुपये का जुर्माना
यूरोपीय संघ ने ऑटोमोबाइल उद्योग में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है, जिसमें 15 प्रमुख कार निर्माता कंपनियों और यूरोपीय ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ACEA) पर 495 मिलियन डॉलर (लगभग 4,237.62 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया गया है। यह जुर्माना ‘एंड-ऑफ-लाइफ’ (ईएलवी) वाहन रीसाइक्लिंग से जुड़े एक दीर्घकालिक कार्टेल के संचालन को लेकर लगाया गया है।
मर्सिडीज-बेंज ने किया खुलासा!
इस घोटाले में शामिल प्रमुख कंपनियों में मर्सिडीज-बेंज, स्टेलेंटिस (जिसमें ओपेल भी शामिल है), मित्सुबिशी, और फोर्ड जैसी अन्य कंपनियां शामिल हैं। मर्सिडीज-बेंज ने सबसे पहले इस कार्टेल का खुलासा किया और इसके बदले में उसे 35 मिलियन पाउंड (लगभग 323.34 करोड़ रुपये) के जुर्माने से छूट मिल गई।
15 साल तक चला यह घोटाला!
यह जुर्माना यूरोपीय आयोग की जांच के बाद लगाया गया है, जिसमें पाया गया कि इन कंपनियों ने 15 वर्षों से प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौतों और ईएलवी वाहनों के रीसाइक्लिंग से जुड़े अनैतिक कार्यों में शामिल थीं।