ट्रैक्टर रैली के दौरान किसान नवनीत सिंह की मौत गोली लगने से नहीं हुई थी: पुलिस

Central Desk
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नई दिल्ली: दिल्ली में 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान किसान नवनीत सिंह की मौत गोली लगने से नहीं हुई थी।

यह जानकारी आज दिल्ली और उत्तर प्रदेश (यूपी) की पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट को दी। इस मामले पर अगली सुनवाई 4 मार्च को होगी।

दिल्ली और यूपी सरकारों की पुलिस ने ये दावा नवनीत सिंह के शव का पोस्टमार्टम और एक्स-रे रिपोर्ट के आधार पर किया है।

नवनीत सिंह का पोस्टमार्टम यूपी के रामपुर के जिला अस्पताल में कराया गया था।

दिल्ली पुलिस ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक नवनीत सिंह की मौत सिर में चोट लगने से हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसी चोट सड़क हादसे के दौरान ही संभव है।

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दिल्ली पुलिस ने घटना के दिन दीनदयाल उपाध्याय मार्ग के सीसीटीवी फुटेज को भी आधार बनाया है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज में पुलिसकर्मी तेज ट्रैक्टर से अपनी जान बचाने को भागते हुए दिख रहे हैं।

दिल्ली पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारी नवनीत सिंह के घायल होने पर किसी नजदीकी अस्पताल में ले जाने की बजाय मौके पर पहुंचे एंबुलेंस पर हमला कर दिया।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने नवनीत सिंह के शरीर को सड़क पर पांच घंटे तक रखा और उसके बाद में ये अफवाह फैलाई गई कि पुलिस की फायरिंग में मौत हो गई।

याचिका नवनीत सिंह के दादा ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि नवनीत सिंह के पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बारे में मीडिया में जो खबरें आईं, उसके मुताबिक नवनीत सिंह की मौत गोली लगने से हुई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक नवनीत सिंह को जो जख्म लगे हैं, वे ट्रैक्टर के उलटने से नहीं हैं, जैसा कि पुलिस अधिकारियों की ओर से बार-बार कहा जा रहा है।

ऐसे में दिल्ली पुलिस के बयान पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।

ज्ञातव्य है कि 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान आईटीओ के पास एक ट्रैक्टर बैरिकेड को तोड़ते हुए आगे बढ़ गया, जिसके बाद ट्रैक्टर चालक ट्रैक्टर समेत उलट गया।

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने एक सीसीटीवी फुटेज जारी किया था। 26 जनवरी को दिल्ली के कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस में हिंसक झड़पें हुई।

इस दौरान लालकिले में भी कुछ लोग घुस गए और धार्मिक ध्वज फहरा दिया।

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