चीनी अर्थव्यवस्था का लचीलापन

News Aroma Media
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बीजिंग:  अमेरिकी सरकार ने वर्ष 2017 में टैक्स कम करने के जरिए आर्थिक विकास को प्रोत्साहित किया।

उसके बाद आर्थिक आंकड़ों में सुधार होने के चलते वर्ष 2018 में चीन के खिलाफ व्यापारिक युद्ध छेड़ा।

अमेरिका की इच्छा थी कि राष्ट्रीय शक्ति सबसे मजबूत होने के समय चीन पर दबाव डाला जाए।

लेकिन अमेरिका ने यह नहीं सोचा था कि चीन की आर्थिक शक्ति और लचीलापन बेहद मजबूत है, उसकी इच्छा पर पानी फिर गया।

वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी फैलने लगी। अमेरिका ने सबसे पहले चीन के वुहान से जनरल कौंसुलेट खाली करने और चीन के साथ सभी फ्लाइट रद्द करने की घोषणा की।

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अमेरिका चाहता था कि उसकी तरह अन्य देश भी चीन के साथ संपर्क तोड़ देंगे, जिससे चीन और दुनिया के बीच आपूर्ति श्रृंखला भी टूट जाएगी।

अमेरिका ने अपना पूरा ध्यान चीन पर दबाव डालने और कालिख पोतने पर दिया, लेकिन अंतत: अपने देश में महामारी अनियंत्रित हो गई।

अब अमेरिका में कोविड-19 के पुष्ट मामलों की संख्या 1.8 करोड़ से अधिक हो चुकी है और मौत के मामलों की संख्या 3.2 लाख से भी ज्यादा है। दोनों संख्या दुनिया के पहले स्थान पर है।

सीडीसी के आंकड़ों के अनुसार सिर्फ 18 दिसंबर को अमेरिका में 4 लाख से अधिक नये पुष्ट मामले दर्ज हुए, जो एक नया रिकॉर्ड है। इस स्थिति में अमेरिका में आर्थिक मंदी अवश्य ही होगी।

वहीं, चीन ने न सिर्फ महामारी पर नियंत्रण किया, बल्कि आर्थिक बहाली भी की।

आंकड़ों के अनुसार नवंबर में चीन के निर्यात में 21.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो फरवरी 2018 से सबसे अधिक है। चीन के आयात में भी लगातार तीन महीनों से सकारात्मक वृद्धि बनी हुई है।

महामारी की स्थिति में चीन में आर्थिक बहाली दुनिया के लिए अच्छी खबर है।

लेकिन अमेरिका इससे खुश नहीं होगा, क्योंकि चीन में आर्थिक वृद्धि के दौरान अमेरिका में आर्थिक मंदी छा रही है। इससे चीन की जीडीपी में तेजी आएगी और जल्द ही अमेरिका के बराबर पहुंच सकती है।

अमेरिका चीन पर दबाव डालना चाहता है और चीन के विकास को रोकना चाहता है, लेकिन उसकी यह इच्छा पूरी होती नहीं दिख रही है।

(साभार-चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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