हाई कोर्ट ने रांची हिंसा मामले में याचिकाकर्ता को जवाब दाखिल करने का दिया निर्देश

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि उस दिन रांची के डोरंडा (Doranda) में अशांति फैलाने की घटना को लेकर कितने आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज हुए थे

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रांची: Jharkhand High Court के चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्र (Sanjay Kumar Mishra) की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में सोमवार को सरायकेला में तबरेज अंसारी की भीड़ द्वारा मौत के बाद रांची में पांच जुलाई 2019 को राजेंद्र चौक के पास हंगामा और इकरा मस्जिद के पास चाकूबाजी की हुई घटना मामले में पंकज यादव की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।

मामले में राज्य सरकार की ओर से स्टेटस रिपोर्ट (Status Report) दाखिल कर बताया गया कि मामले में कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।

अगली सुनवाई 19 जून निर्धारित की

इस पर याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि डोरंडा के राजेंद्र चौक पर में उपद्रव करने वाले लोग और 10 जून 2022 में मेन रोड में हिंसा करने वाले लोगों में से कई लोग कॉमन हैं।

अगर वर्ष 2019 में ही अशांति फैलाने वाले ऐसे गैंग के खिलाफ एक्शन ले लिया जाता तो साल 2022 में मेन रोड में 10 जून को हुई घटना से बचा जा सकता था।

इस पर कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार के जवाब पर याचिकाकर्ता को प्रति उत्तर देने एवं पूरक शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।

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कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 19 जून निर्धारित की है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजीव कुमार ने पैरवी की।

आरोपितों को फांसी देने की मांग की गई

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि उस दिन रांची के डोरंडा (Doranda) में अशांति फैलाने की घटना को लेकर कितने आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज हुए थे।

इस पर कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा था। जून 2019 को सरायकेला खरसावां में तबरेज अंसारी के मॉब लिंचिंग की घटना हुई थी।

इसे लेकर रांची में पांच जुलाई 2019 को मुस्लिम धर्मावलंबियों ने नमाज अदा करने के बाद हजारों की संख्या में रांची के उर्स मैदान में सरायकेला में तबरेज अंसारी के हत्याकांड को लेकर आक्रोश सभा किया था।

सभा में तबरेज की हत्या के आरोपितों को फांसी देने की मांग की गई थी।

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