नक्सलवाद की उलटी गिनती शुरू!, 2026 तक भारत होगा नक्सलमुक्त

नक्सलवाद से अति प्रभावित जिलों में छत्तीसगढ़ के चार जिले- बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा, झारखंड का पश्चिमी सिंहभूम और महाराष्ट्र का गढ़चिरौली शामिल हैं।

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DELHI : देश में दशकों से चुनौती बने नक्सलवाद पर केंद्र सरकार ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए इसे पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऐलान किया कि 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि नक्सलवाद से अति प्रभावित जिलों की संख्या 12 से घटकर अब केवल छह रह गई है, जो सरकार की आक्रामक रणनीति का परिणाम है।

नक्सलवाद का प्रभाव लगातार कम हो रहा

गृह मंत्रालय के अनुसार, देशभर में पहले नक्सलवाद से प्रभावित 38 जिले थे, जिनमें से 12 जिले अति प्रभावित माने जाते थे। अब यह संख्या घटकर केवल छह रह गई है। नक्सलवाद से अति प्रभावित जिलों में छत्तीसगढ़ के चार जिले- बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा, झारखंड का पश्चिमी सिंहभूम और महाराष्ट्र का गढ़चिरौली शामिल हैं।

इसके अलावा, अपेक्षाकृत कम प्रभावित जिलों की संख्या भी नौ से घटकर छह हो गई है, जिनमें आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना के जिले शामिल हैं।

वहीं, बेहद कम प्रभावित जिलों की संख्या भी 17 से घटकर छह रह गई है, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि नक्सलवाद का प्रभाव सीमित हो चुका है।

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सुरक्षाबलों की आक्रामक कार्रवाई जारी

सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ अपने अभियान को और तेज कर दिया है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ाई गई है और कई गुप्त ठिकानों को ध्वस्त कर दिया गया है।

सुरक्षाबलों ने बीते कुछ महीनों में कई बड़े ऑपरेशन चलाकर नक्सली ठिकानों से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए हैं।

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), राज्य पुलिस बल और अन्य अर्धसैनिक बलों के संयुक्त प्रयास से नक्सलियों के प्रभाव को कमजोर किया जा रहा है।

विकास योजनाओं से कमजोर हो रहे नक्सली संगठन

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार न केवल सुरक्षा अभियान चला रही है, बल्कि इन इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है। सड़क निर्माण, बिजली आपूर्ति, स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार और शिक्षा के क्षेत्र में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ग्रामीण इलाकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचने से नक्सलियों की भर्ती प्रक्रिया कमजोर पड़ रही है।

सरकार गांवों को इंटरनेट से जोड़ रही है, स्थानीय स्तर पर उद्योगों को बढ़ावा दे रही है और लोगों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। इससे नक्सली संगठनों की पकड़ लगातार कमजोर हो रही है।

2026 तक नक्सलवाद का सफाया करने का संकल्प

अमित शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार की दोहरी रणनीति-सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई और विकास कार्यों की तेज रफ्तार-की वजह से नक्सलवाद का प्रभाव बेहद सीमित हो गया है।

गृह मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले महीनों में नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की संख्या और बढ़ाई जाएगी और नक्सली ठिकानों पर और ज्यादा हमले किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि अगर इसी रफ्तार से अभियान चलता रहा, तो जल्द ही देश को इस समस्या से पूरी तरह छुटकारा मिल जाएगा।

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