Mother sold her land to get her son’s body :झारखंड के देवघर जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मोहनपुर प्रखंड के चकरमा गांव निवासी कन्हैया कापरी की इलाज के दौरान मौत हो गई, लेकिन अस्पताल से शव सौंपने के लिए परिजनों को 40 हजार रुपये का बिल भरना पड़ा। जब परिजन यह राशि नहीं दे सके, तो मजबूरन उसकी मां को अपनी जमीन बेचनी पड़ी।
सड़क हादसे में घायल हुआ युवक, इलाज के दौरान मौत
कन्हैया कापरी मंगलवार को एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे देवघर के कुंडा स्थित सेवा सदन अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान शुक्रवार को उसकी मौत हो गई। इलाज के दौरान 40 हजार रुपये का बिल बना, जिसे चुकाने में परिजन असमर्थ थे।
अस्पताल ने नहीं दिया शव, मां ने बेची जमीन
परिजनों का आरोप है कि जब वे बिल नहीं चुका सके, तो अस्पताल प्रबंधन ने शव देने से इनकार कर दिया। बेटे का अंतिम दर्शन करने की तड़प में मां को अपनी जमीन तक बेचनी पड़ी। यह वही जमीन थी जो उनकी अंतिम बचत मानी जा सकती है। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि शव रोकने जैसी कोई बात नहीं हुई।
बाबूलाल बोले– संवेदनहीन हो चुकी है हेमंत सरकार
पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने इस घटना को लेकर हेमंत सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा– “एक असहाय मां को अपने बेटे का शव लेने के लिए अपनी जमीन बेचनी पड़ी, यह घटना हेमंत सरकार के मुंह पर तमाचा है।”
मरांडी ने सरकार पर आरोप लगाया कि काले धन और लालच के कारण व्यवस्था इतनी अमानवीय हो चुकी है कि मृतकों की गरिमा तक का सम्मान नहीं बचा है। उन्होंने मांग की कि अगर सरकार में ज़रा भी शर्म बाकी है, तो वह इस मामले में अस्पताल प्रशासन पर सख्त कार्रवाई करे।
सरकारी चुप्पी पर उठे सवाल, कार्रवाई की मांग तेज
इस घटना को लेकर आम जनता और विपक्ष में भारी आक्रोश है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब गरीब मरीजों के लिए कई योजनाएं और स्वास्थ्य बीमा मौजूद हैं, तो ऐसे दर्दनाक हालात क्यों बन रहे हैं कि किसी मां को अपने बेटे का शव पाने के लिए अपनी जमीन तक बेचनी पड़े? अब इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई और जवाबदेही की मांग जोर पकड़ रही है।