तकनीकी खामियों से अटका मंईयां योजना का क्रियान्वयन, हजारों महिलाएं प्रभावित

इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना था, लेकिन जिस तरह की लापरवाही और अव्यवस्था सामने आई है, उससे योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ना सेविकाओं को स्पष्ट दिशा मिल रही है और ना ही लाभार्थियों को कोई ठोस सहायता।

Smriti Mishra
3 Min Read

Implementation of Maiya scheme stuck राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण के उद्देश्य से शुरू की गई मंइयां योजना राजधानी रांची के सदर अंचल में कागज़ी जाल और तकनीकी गड़बड़ियों में उलझकर रह गई है। लाभ पाने की उम्मीद में फॉर्म जमा करने वाली महिलाएं अब भटकाव और निराशा के दौर से गुजर रही हैं। फॉर्म गुम होने, गलत जानकारी दर्ज होने और सिस्टम में डेटा न मिलने की वजह से हजारों महिलाएं हक से वंचित हैं।

सैकड़ों फॉर्म गायब, कई में वॉर्ड की गलती

सदर अंचल कार्यालय में आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा अब तक करीब 10 से 12 हजार फॉर्म जमा किए जा चुके हैं। लेकिन कई महिलाओं के फॉर्म सिस्टम में दर्ज ही नहीं हैं, और कुछ में ग़लत वार्ड नंबर या अन्य जानकारियाँ दर्ज हो गई हैं। जिन लाभार्थियों के दस्तावेज़ गायब हैं, उन्हें न दोबारा फॉर्म भरने का निर्देश दिया जा रहा है, न ही कोई वैकल्पिक उपाय सुझाया गया है।

सिस्टम धीमा, अपलोडिंग और सत्यापन में तकनीकी बाधाएं

स्थानीय अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि योजना का पोर्टल बेहद धीमा है। सत्यापन और अपलोडिंग की प्रक्रिया नियमित रूप से बाधित हो रही है, जिससे कई हफ्तों से लंबित फॉर्म अब तक प्रोसेस नहीं हो पाए हैं। इस तकनीकी अव्यवस्था के बारे में विभाग को सूचित कर दिया गया है, लेकिन अब तक समाधान नहीं मिला।

प्रज्ञा केंद्रों की भूमिका पर सवाल

सेविकाओं ने बताया कि योजना के प्रारंभिक चरण में जब प्रज्ञा केंद्रों को दस्तावेज़ जमा और अपलोडिंग की जिम्मेदारी दी गई थी, तब उन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिला। कई फॉर्म गलत तरीके से भरे गए या अपलोड ही नहीं किए गए। अब जब लाभार्थी समस्याओं को लेकर आते हैं, तो न सेविकाओं के पास जवाब होता है, न अधिकारियों के पास रास्ता।

लाभार्थियों में असमंजस और रोष

सबसे गंभीर स्थिति तब उत्पन्न होती है जब जिन महिलाओं के फॉर्म गुम हो जाते हैं, उन्हें यह भी नहीं बताया जाता कि अगला कदम क्या होगा। कई महिलाओं ने शिकायत की है कि वे महीनों से आंगनबाड़ी केंद्र और अंचल कार्यालयों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन हर जगह से उन्हें निराशा ही मिल रही है।

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योजना की जमीनी हकीकत उजागर

इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना था, लेकिन जिस तरह की लापरवाही और अव्यवस्था सामने आई है, उससे योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ना सेविकाओं को स्पष्ट दिशा मिल रही है और ना ही लाभार्थियों को कोई ठोस सहायता।

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