कहीं रांची सीट पर फाइट को नया एंगल न दे दें AIMIM प्रत्याशी महताब आलम…

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Jharkhand Assembly Elections : झारखंड विधानसभा चुनाव (Jharkhand Assembly Elections) इस बार कई मायनों में अलग है। चुनाव को लेकर अब सभी पार्टियां और उम्मीदवार अपने प्रचार के साथ ही जीत का समीकरण बनाने में जुट गए हैं।

इस बार चुनाव प्रचार (Election campaign) के दौरान दीपावली के त्योहार का सीजन भी पड़ रहा है। ऐसे में जहां बाजारों में त्योहारी रौनक नजर आ रही है। वहीं चुनाव को लेकर रौनक और उत्साह नजर आ रहा है।

भाजपा ने अपने नामचीन चेहरों को मैदान में उतारा है। सवाल है कि क्या ये दिग्गज JMM-Congress को फंसाएंगे या खुद इनके जाल में फंस जाएंगे।

प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन, नेता प्रतिपक्ष अमर बाउरी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी सिंह और पूर्व सांसद रवींद्र पांडेय चुनाव लड़ रहे हैं। पिछले दो विधानसभा चुनावों की तस्वीर से मौजूदा स्थितियों की तुलना करें, तो प्रथम दृष्टया लड़ाई कांटे की दिखती है।

झारखंड मुक्ति मोर्चा की पहली महिला राज्यसभा हैं महुआ मांझी 

भाजपा इस संघर्ष को आसान बनाने की रणनीति तय करने में व्यस्त है, तो झामुमो-कांग्रेस के नेता जमीन पर इन्हें घेरने में जुटे हैं। वहीं रांची विधानसभा सीट की बात करें तो यहां से भाजपा के सीपी सिंह रांची से कभी चुनाव नहीं हारे। सीपी सिंह छह बार से रांची से जीते हैं। कहा जा सकता है पहले वाले आकर्षण में कुछ कमी आई है।

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पिछले विधानसभा चुनाव में इनका वोट शेयर करीब 12 प्रतिशत कम हो गया था। वहीं JMM की महुआ मांझी चुनावी मैदान में हैं, बता दें, महुआ मांझी (Mahua Manjhi) JMM की ओर से राज्यसभा सदस्य भी हैं।

महुआ मांझी झारखंड मुक्ति मोर्चा की पहली महिला हैं जो राज्यसभा में गईं। यहां बता दें कि महुआ माजी को 2014 में 36,897 वोट मिले थे तो 2019 में महुआ मांझी 73,569 वोट मिले। इधर देखें तो AIMIM के महताब आलम(AIMIM   candidate Mahtab Alam) भी चुनावी मैदान में हैं।

AIMIM के महताब मुस्लिम वोटरों से साथ आने की अपील करते नज़र आ रहे हैं। उनकी बैठकों और दौरों में मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं की भी अच्छी-खासी मौजूदगी रहती है।

फिलहाल सभी तरफ प्रचार बैठकें चल रही हैं। हर किसी की कोशिश, चाहे जो भी समुदाय हो, उसके मतदाताओं को आकर्षित करने की है।

मुस्लिम वोटर (Muslim Voter) एक साथ किसी भी राजनैतिक पार्टी के पक्ष में मतदान करते हैं तो यह संख्या हार जीत की निर्णायक स्थिति में होगी और ऐसी स्थिति में यहां भाजपा और JMM के लिए मुश्किल बढ़ सकती हैं।

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