झारखंड : पूर्व विधायक की सीएम हेमंत सोरेन से गुहार, कोरोना पीड़ित पत्नी ICU में है भर्ती ; कहा- अगर ऐसा हुआ तो सरकार पर लगेगा कलंक

News Aroma Media
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हजारीबाग: जिले के बरही विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक राम लखन सिंह ने सूबे के सीएम हेमंत सोरेन से अपना बकाया पेंशन व धान बिक्री के बकाया पैसे दिलाने की गुहार लगाई है।

बता दें कि अपने कार्यकाल में दर्जनों आंदोलनों में ईमानदारी के मिसाल बने पूर्व विधायक रामलखन सिंह की पत्नी कोरोना से गंभीर रूप से बीमार होकर रांची के एक निजी अस्पताल में आईसीयू में भर्ती हैं।

उनके इलाज के लिए भी अब पूर्व विधायक के पास पैसे नही हैं। ऐसे में उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर उनका दो महीने का बकाया पेंशन और धान बिक्री की बकाया राशि जल्द से जल्द देने की गुहार लगाई है।

पूर्व विधायक को फरवरी के बाद पेंशन नहीं मिली है। उन्होंने कहा है कि आईसीयू में भर्ती उनकी पत्नी के इलाज के लिए उन्हें पैसे की सख्त जरूरत है।

अगर समय पर उन्हें पेंशन की राशि नहीं मिलती है और उनकी पत्नी कोरोना से जंग हार जाती हैं तो इसका कलंक उनकी सरकार पर लगेगा।

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विधानसभा सचिव से भी लगाई थी गुहार

पूर्व विधायक ने कहा कि चौपारण के बेला पैक्स में धान बेचा था जिसका आधा से अधिक पैसा, जो करीब एक लाख 39 हजार रुपये है, का भुगतान उन्हें नहीं मिला है।

पूर्व विधायक ने कहा है कि उन्होंने विधानसभा के सचिव और उपसचिव को पत्र लिखकर अपनी स्थिति से अवगत कराते हुए बकाया पेंशन के भुगतान की मांग की थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

वहीं दूसरी ओर धान की बकाया राशि भुगतान के लिए बेला पैक्स और जिला प्रबंधक से भी मांग की थी लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला।

अपने कार्यकाल में ईमानदारी से दर्जनों आंदोलन चलाया

1990 से 1995 तक बरही विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे वयोवृद्ध रामलखन सिंह (90) कहते हैं कि मैंने अपने कार्यकाल में काफी ईमानदारी बरती।

कई बड़े ऑफर को ठुकराया। कई आंदोलन चलाए इसका खामियाजा भी झेलना पड़ा।

पत्नी रांची में कोरोना से जूझ रही हैं। मैं अपने गांव में छतरपुरा में रह रहा हूं।

देश और दुनिया की कोरोना बीमारी से हालत खराब है। ऐसे में लोगों की जान बचाने का संकट है। उन्होंने अपने कार्यकाल में क्षेत्र में कई आंदोलन चलाए।

पदमा, लावालौंग समेत कई प्रखंडों को बनाया। उन्होंने 1964, 1965, 1967 में महंगाई व अन्य मुद्दों पर सत्याग्रह आंदोलन भी चलाया। सड़क बनाने के लिए उन्होंने 1989 में 14 घंटे तक रेल जाम किया था।

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