Bribery Cases: झारखंड में 6 करोड़ रुपये की रिश्वतखोरी के मामले (Bribery Cases) में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पुलिस पर झूठे सबूत तैयार करने और दो लोगों को अवैध रूप से हिरासत में रखने का आरोप लगाया है।
इस मामले में गुरुवार को न्यायाधीश एके चौधरी की अदालत में सुनवाई हुई, जहां सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सबूत मांगे। अदालत ने 24 अप्रैल को अगली सुनवाई तय की है।
पुलिस ने जबरन हिरासत में रखे थे दो लोग
ED के अनुसार, रांची पुलिस (Ranchi Police) ने अधिवक्ता सुजीत कुमार और संजीव कुमार पांडेय को गलत तरीके से हिरासत में रखा और इस दौरान ED के खिलाफ झूठे सबूत गढ़े।
ED का दावा है कि पुलिस ने 9 अक्टूबर 2024 को सुजीत कुमार की स्कॉर्पियो (JH-01FR-4730) जब्त करने का दावा किया, लेकिन GPS जांच में पाया गया कि यह गाड़ी 5 अक्टूबर से ही पंडरा थाने में खड़ी थी।
मोबाइल डेटा और डायरी की बरामदगी पर उठे सवाल
ED का आरोप है कि पुलिस ने गिरफ्तारी के दौरान सुजीत कुमार और संजीव कुमार पांडेय (Sujeet Kumar and Sanjeev Kumar Pandey) के मोबाइल फोन जब्त किए, लेकिन जांच में उनके फोन के अलग-अलग स्थानों पर एक्टिव होने के सबूत मिले।
इसके अलावा, पुलिस ने एक डायरी जब्त करने का दावा किया, जिसमें लिखा था कि ED के अधिकारियों को रिश्वत दी जा रही थी। ED का कहना है कि यह डायरी भी पुलिस द्वारा गढ़ी गई है।
रिश्वत के रूप में करोड़ों का लेन-देन
ED की जांच में पाया गया कि इस मामले में रिश्वत के रूप में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ:
-संजीव कुमार पांडेय ने 35 लाख रुपये रिश्वत दी।
-जय कुमार राम ने 3.40 करोड़ रुपये और एक आईफोन दिए।
-दिवाकर द्विवेदी ने 1 करोड़ रुपये रिश्वत दी।
-प्रभात भूषण ने 1.05 करोड़ रुपये रिश्वत दी।
सरकार ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
सरकार की ओर से अदालत में पेश अधिवक्ता ने ED के आरोपों को गलत और निराधार बताया। उनका कहना था कि यदि ED के पास कोई ठोस सबूत हैं, तो उन्हें लिखित रूप में पेश किया जाए।
ED ने इस पूरे मामले की CBI से जांच कराने की मांग की है। अदालत ने दोनों पक्षों को 24 अप्रैल तक लिखित सबूत जमा करने का निर्देश दिया।