झारखंड : भाकपा माओवादियों को बड़ा झटका, एरिया कमांडर विमल लोहरा ने किया आत्मसमर्पण

News Aroma Media
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खूंटी: प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के चलकद एरिया कमांडर विमल लोहरा उर्फ बिरसा पाहन उर्फ कोका पाहन ने शनिवार को खूंटी पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

उपायुक्त शशि रंजन और पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर ने माला पहना कर उसका मुख्यधारा में शामिल होने का स्वागत किया।

एसपी कार्यालय में आत्मसमर्पण करने के बाद विमल लोहरा ने कहा कि राज्य सरकार की वामपंथी उग्रवादियों की समर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उसने आत्मसमर्पण किया और वह समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर परिवार के साथ जीवन गुजारना चाहता है।

विमल लोहरा (39) अड़की थाना के रायतोड़ांग गांव निवासी संबर पाहन का बेटा है। वह पिछले दस वर्षों से भाकपा माओवादी संगठन से जुड़ा था।

उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, अपहरण, आर्म्स एक्ट, सीएलसी सहित कई संगीन धाराओं के तहत अड़की, सायको, मुरहू सहित कई अन्य थानों में एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं।

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नक्सलियों ने पुलिस का जासूस बताकर मारपीट की

विमल लोहरा ने बताया कि उसका गांव रायतोड़ांग घोर उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र है। वह 2012 में भाकपा माओवादी संगठन से जुड़ गया।

2012 में वह जोनल कमांडर कुंदन पाहन, डिंबा पाहन और श्याम श्याम पाहन आदि के साथ गांव और अन्य इलाकों में रहता था।

दो जून 2012 को पुलिस पार्टी उसके गांव रायपुरा क्षेत्र में ड्यूटी करने आई थी। पुलिस पार्टी की मोटरसाइकिल खराब हो गयी थी।

पुलिस पार्टी ने खराब वाहन को अपने साथ ले जाने के लिए गांव वालों से रस्सी की मांग की तो विमल ने अपने घर से पुलिस पार्टी को प्लास्टिक की रस्सी ला कर दिया।

उसके बाद पुलिस पार्टी खराब गाड़ी को टोचन करके अपने साथ ले गयी। इस बात की जानकारी भाकपा माओवादी के जोनल कमांडर कुंदन पाहन, डिंबा पाहन और श्याम पहन को हुई।

इसके एक महीने बाद जुलाई महीने में भाकपा माओवादी के हथियारबंद सदस्य डिंबा पाहन ने अपने दस्ते के साथ रात 10-11 बजे विमल के घर जाकर दरवाजा खुलवाया और उसे पुलिस का जासूस होने का आरोप लगाते हुए उसके साथ मारपीट करने लगा।

डिब्बा पहन अपने हाथ में पकड़े हथियार से उसके चेहरे पर मारा, तो उसकी ठुड्डी कट गई। मारपीट होता देख उसकी पत्नी ने उसे बचाने की कोशिश की तो, उसे भी पार्टी के सदस्यों द्वारा मारा-पीटा गया।

बाद में उसे जोर जबरदस्ती पकड़कर डिंबा पाहन अपने सदस्यों के साथ रूगडू जंगल लेकर चला गया, जहां उसे रात भर हाथ पैर बांधकर रखा गया।

सुबह होने पर लगभग नौ बजे जोनल कमांडर कुंदन पाहन अपने हथियारबंद दस्ते के साथ रूगडू जंगल आया। कुंदन पहन ने उसे पुलिस का जासूस होने का झूठा आरोप लगाकर पूछताछ की।

विमल ने इस आरोप को नकार दिया। तब कुंदन पहन ने डिंबा पाहन को निगरानी रखने को कहा और वहां से चला गया। उसने कई बार भागने की कोशिश की, पर हर बार पकड़ा गया।

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली ने कहा कि अब भाकपा माओवादी अपनी दिशा और सिद्धांत से भटक गए हैं और यह शोषण और लेवी वसूलने वाला संगठन बन कर रह गया है। उसने दूसरे नक्सलियों और उग्रवादियों से भी आत्मसमर्पण करने और हथियार डालने की अपील की|

कई हत्याकांड और नक्सली वारदातों में शामिल था विमल लोहरा

चलकत एरिया कमेटी के एरिया कमांडर विमल लोहरा उर्फ बिरसा पाहन ने पुलिस के समक्ष स्वीकार किया कि 20 दिसंबर 2015 में एतरेडही अडकी में स्व लाका मुंडा की बेटी बिरसी समद की पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाकर गोली मारकर हत्या कर देने के मामले में वह  2016 में ग्राम शामिल था।

कुरुंदा में पुलिस पार्टी पर हमल, 2017 में अप्रैल महीने में बिरबांकी प्रोजेक्ट हाई स्कूल, अस्पताल, प्रोजेक्ट भवन और टावर को विस्फोट कर उड़ा देने की घटना में भी विमल शामिल था।

2017 के सितंबर महीने में मुरहू थाना के कीताहातू चौक में पुलिस जवान आशियन पूर्ति की गोली मारकर हत्या कर देने और मोटरसाइकिल ले जाने के मामले में भी वह शामिल था।

वर्ष 2018 के फरवरी महीने में अड़की थाना के चलकद कुदालाता जंगल के पास हरवे हथियार से लैस होकर पुलिस बल पर हमला और 2018 के अगस्त महीने में माओवादी बंदी के दौरान खूंटी’तमाड़ रोड पर आड़ा घाटी में पंजाबी ट्रेलर चालक की गोली मारकर उसे ट्रेलर में आग लगाकर जला देने के मामले में भी विमल की संलिप्तता थी।

माओवादियों के लिए बड़ा झटका : एसपी

माओवादी कऐरिया कमांडर के आत्मसमर्पण पर एसपी आशुतोष शेखर सहित अन्य अधिकारियों ने कहा कि चलकत एरिया कमेटी के एरिया कमांडर विमल लोहरा उर्फ खुद बिरसा पाहन के आत्मसमर्पण से भाकपा माओवादी नक्सली संगठन की केंद्रीय कमेटी सदस्य आनंद उर्फ रमेश मांझी का दस्ता, जो सरायकेला खरसावां, खूंटी और चाईबासा जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में झारखंड पुलिस के लिए लगातार चुनौती बना हुआ था, ना सिर्फ एक बहुत बड़ा झटका लगा है, बल्कि क्षेत्र में संगठन के टूटने की प्रबल संभावना हो गई है।संगठन के कई अन्य सदस्यों के संगठन छोड़कर मुख्यधारा में आने की संभावना है।

यह झारखंड पुलिस के लिए बहुत बड़ी सफलता है। इस अवसर पर 94 बटालियन के कमांडेंट राधेश्याम सिंह द्वितीय कमान अधिकारी प्रकाश रंजन मिश्रा और मृत्युंजय कुमार, एएसपी अभियान रमेश कुमार, 26 वाहिनी एसएसबी के द्वितीय कमान अधिकारी वैभव सिंह परिहार सिंह, खूंटी के एसडीपीओ अमित कुमार, पुलिस उपाधीक्षक जयदीप लकड़ा सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

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