BAU के सहायक प्राध्यापक की बनाई मशीन को केंद्र ने दिया पेटेंट, आम की गुठली से…

इस मशीन को बनाने की लागत प्रतिदिन 15 से 20 हजार रुपये आएगी और प्रति घंटे 15 से 18 किलोग्राम बीज गुठली से अलग किए जा सकेंगे।

Central Desk
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BAU assistant professor’s Machine get center patent : बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) के कृषि अभियंत्रण विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सुशील कुमार पांडेय (Dr. Sushil Kumar Pandey) ने एक ऐसी मशीन (Machine) बनाई है, जो सस्ती और हाथ से चलने वाली है।

यह किसानों (Farmers) के लिए अत्यंत उपयोगी है। आम की गुठली (Mango Kernels) से बीज (Seed) निकालने वाली इस हस्तचालित मशीन को भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्यरत पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क महानियंत्रक द्वारा इस आशय का प्रमाण पत्र जारी किया गया है।

किसानों की आय में होगी वृद्धि

BAU के जनसंपर्क अधिकारी पंकज वत्सल ने इसकी जानकारी दी है। BAU के कृषि अभियंत्रण विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सुशील कुमार पांडेय ने एक मीडिया हाउस को को बताया कि आम की गुठली में न सिर्फ उच्च प्रोटीन (6%) और कार्बोहाइड्रेट (60%) भरपूर मात्रा में होता है, बल्कि इसमें 11.5% तेल भी होता है।

इसके चलते इस समय खाद्य प्रसंस्करण और बेकरी, कंडीशनर, साबुन, लोशन से जुड़े कॉस्मेटिक उद्योगों में इसकी काफी डिमांड है।

डॉ. पांडे ने कहा कि देश के कई इलाकों में आम की गुठली 5 से 8 रुपये प्रति किलो तक बिकती है। उनके द्वारा आविष्कृत इस मशीन के उपयोग से समय और श्रम लागत की बचत होने से इन उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।

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इस मशीन को बनाने की लागत प्रतिदिन 15 से 20 हजार रुपये आएगी और प्रति घंटे 15 से 18 किलोग्राम बीज गुठली से अलग किए जा सकेंगे।

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