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एक जुलाई से पहले हुई आपराधिक घटनाओं की FIR और Trial IPC-CrPC के तहत या BNS-BNSS के तहत, CID DG ने किया स्पष्ट

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Order Issued by CID DG : 1 जुलाई से लागू हुए तीन नये आपराधिक कानूनों को लेकर झारखंड में Confusion वाली स्थिति पैदा हुई। FIR दर्ज करने को लेकर कई तरह संदेह पैदा हो रहे थे। इसलिए ऐसी स्थिति से निपटने के लिए CID DG ने एक आदेश जारी किया है।

दरअसल, एक जुलाई 2024 के पहले की आपराधिक घटना के लिए IPC के प्रावधान लागू हैं, जिनके विचारण की प्रक्रिया CrPC के तहत चलेगी।

CID DG द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि यदि कोई आपराधिक घटना एक जुलाई 2024 से पहले हुई हो, लेकिन उसमें FIR एक जुलाई 2024 के बाद दर्ज हो रही है, तो वैसी स्थिति में ऐसे मामलों में IPC की धाराएं लगेंगी, लेकिन इसके विचारण (trial) की प्रक्रिया नये कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (BNSS) के तहत होगी।

दूसरी तरफ, यदि एक जुलाई 2024 के बाद की आपराधिक घटना को लेकर कोई FIR दर्ज होगी, तो उसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराएं लगेंगी, साथ ही कानूनी प्रक्रिया का अनुपालन भी BNSS 2023 के तहत होगा।

बता दें कि CID DG अनुराग गुप्ता ने यह आदेश DGP अजय कुमार सिंह के अनुमोदन के बाद जारी किया है। आदेश में जिक्र है कि BNS 2023 की धारा 358 और BNSS की धारा 531 के अनुरूप आदेश जारी हुआ है।

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