टाटा से रांची के बीच हाइपरलूप परियोजना को मिलेगी रफ्तार, IIT मद्रास के परीक्षण से बढ़ी उम्मीदें

Digital Desk
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Expectations from Tata to realize Hyperloop project between Ranchi: टाटा से रांची के बीच हाइपरलूप प्रोजेक्ट को साकार करने की उम्मीदें फिर से तेज हो गयी हैं।

IIT मद्रास द्वारा हाइपरलूप तकनीक का सफल परीक्षण करने के बाद झारखंड में इस हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट सिस्टम को लेकर संभावनाएं बढ़ गयी हैं।

इस परियोजना में टाटा स्टील भी अहम भूमिका निभा रहा है, जो इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने की दिशा में काम कर रहा है।

बड़ी उपलब्धि मिली 

IIT मद्रास ने 422 मीटर लंबे हाइपरलूप ट्रैक पर सफल परीक्षण पूरा किया है। इस परीक्षण में पॉड्स को 700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाने की संभावना पर अध्ययन किया गया।

रेलवे मंत्रालय की आर्थिक सहायता से तैयार इस प्रोटोटाइप को हाइपरलूप तकनीक के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

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परियोजना की नींव 2017 में रखी गयी 

इस परियोजना में टाटा स्टील का योगदान महत्वपूर्ण है। ट्यूटर हाइपरलूप और IIT मद्रास के साथ समझौते के तहत टाटा स्टील स्टील और कंपोजिट मैटेरियल के विकास में अपनी विशेषज्ञता का उपयोग कर रहा है।

कंपनी का लक्ष्य हाइपरलूप ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बड़े पैमाने पर व्यावहारिक बनाना है।

हाइपरलूप परियोजना की नींव 2017 में उस समय रखी गयी थी, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट सिस्टम की घोषणा की थी।

हालांकि, सरकार बदलने के बाद इस परियोजना पर काम रुक गया था।

अब रेलवे मंत्रालय, टाटा स्टील और आइआइटी मद्रास की सक्रिय भागीदारी से इस प्रोजेक्ट के साकार होने की उम्मीदें फिर से बढ़ गयी हैं।

परिवहन साधनों में क्रांतिकारी बदलाव 

हाइपरलूप ट्रांसपोर्ट सिस्टम में पॉड्स एक बेलनाकार, खोखले ट्रैक के अंदर तेज गति से चलते हैं।

यह तकनीक यात्रा के समय को काफी कम करने में सक्षम है और भविष्य के परिवहन साधनों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है

अगर टाटा से रांची के बीच हाइपरलूप प्रोजेक्ट साकार होता है, तो झारखंड में परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव आयेगा।

इससे न केवल यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

आधुनिक परिवहन तकनीक में अग्रणी

IIT मद्रास के सफल परीक्षण के बाद अब उच्च गति पर पॉड्स की टेस्टिंग की जायेगी।

इसके बाद रेलवे मंत्रालय और टाटा स्टील इस तकनीक को व्यावहारिक रूप देने के लिए आगे कदम बढ़ायेंगे।

आने वाले वर्षों में यह परियोजना झारखंड को आधुनिक परिवहन तकनीक में अग्रणी बना सकती है।

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