पारा शिक्षकों के दस्तावेजों से हुई छेड़छाड़, अधिकारियों ने पारा शिक्षकों पर ही मढ़ा दोष, मानदेय भुगतान पर मंडरा रहा खतरा

News Aroma Media
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बोकारो : मुश्किलें पारा शिक्षकों का पीछा नहीं छोड़ रही हैं। इस बार मामला गोमिया प्रखंड के पारा शिक्षकों से जुड़ा है।

दरअसल गोमिया प्रखंड के पारा शिक्षकों के बीआरसी में जमा दस्तावेजों में ओवरराइटिंग कर छेड़छाड़ किये जाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है।

गोमिया के प्रभारी बीईईओ दिनेश मिश्र की ओर से कार्यालय में कार्यरत प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी सपन कुमार दास, लेखापाल होरिल प्रजापति, आदेशपाल गौरीशंकर प्रजापति, प्रखंड साधनसेवी सुभाषचंद्र महतो, कंप्यूटर ऑपरेटर (मध्याह्न् भोजन योजना) सुमंत कुमार, ओमप्रकाश, सुशील कुमार से मांगे गये स्पष्टीकरण में उन सबने पारा शिक्षकों को ही जिम्मेदार ठहरा दिया।

इधर, पारा शिक्षकों ने विभागीय कर्मचारियों को ही इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।

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प्रभारी बीईईओ दिनेश मिश्र ने बताया कि गोमिया प्रखंड शिक्षा समिति से जुड़े पारा शिक्षकों के अनुमोदन की पंजी लगभग सात वर्षों से गायब है, जिसके कारण यहां के पारा शिक्षकों का डाटा ई-विद्या वाहिनी वेबपोर्टल पर नहीं आ पा रहा है।

जबकि, राज्य सरकार ने पिछले वर्ष ही पारा शिक्षकों के कार्य निष्पादन के लिए वेबपोर्टल बनाया है। उस पोर्टल पर सभी पारा शिक्षकों के सर्टिफिकेट अपलोड करने का निर्देश दिया था।

गोमिया के पारा शिक्षकों की अनुमोदन की पंजी गायब हो जाने के कारण करीब 594 पारा शिक्षकों का डाटा वेबपोर्टल में नहीं चढ़ाया जा सका है।

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नयी अनुमोदन पंजी अमल में लाने के लिए पारा शिक्षकों से दस्तावेजों की मांग कर जमा किया गया, परंतु जमा दस्तावेजों में कार्यालय में ही कलम से ओवरराइटिंग करते हुए छेड़छाड़ किये जाने का मामला प्रकाश में आया।

मानदेय भुगतान पर मंडरा रहा खतरा

इधर, पारा शिक्षक संघ के प्रखंड अध्यक्ष जितेंद्र प्रसाद का कहना है कि इससे पहले भी दो बार पारा शिक्षकों ने अनुमोदन संचिका (स्वअभिप्रमाणित विहित प्रपत्र) कार्यालय में जमा किया था।

उसके बावजूद उसे ई-विद्यावाहिनी वेबपोर्टल पर अपलोड कर ऑनलाइन नहीं किया गया।

जबकि, राज्य के शिक्षा निदेशक शैलेश चौरसिया ने 30 मार्च तक ऑनलाइन करने के निर्देश दिया था। पोर्टल पर सर्टिफिकेट अपलोड नहीं होने की स्थिति में अप्रैल से यहां के पारा शिक्षकों का मानदेय भुगतान रोक दिया जायेगा।

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