आज़ादी के बाद से जंगल महल क्षेत्र पश्चिम बंगाल राज्य का सबसे उपेक्षित क्षेत्र रहा: सुदेश महतो

Central Desk
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रांची: पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिला अंतर्गत बागमुंडी विधानसभा के लहरिया में रविवार को आजसू पार्टी का विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो थे।

सम्मेलन में वृहत झारखंड क्षेत्र के लोगों की सामाजिक एवं आर्थिक समस्याओं पर गहन चिंतन किया गया। साथ ही इसके निदान के लिए आगे की रणनीति तैयार की गयी। सुदेश कुमार महतो में कहा कि आज़ादी के बाद से जंगल महल क्षेत्र पश्चिम बंगाल राज्य का सबसे उपेक्षित क्षेत्र रहा है।

लोगों को कुछ नहीं मिला, बल्कि उन्हें अपने जंगलों को भी खोना पड़ा। राज्य द्वारा किए गए बड़े पैमाने पर वनों की कटाई से उनका वन-आधारित आजीविका को बहुत नुकसान हुआ।

सिंचाई में सुधार और कृषि के विकास पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। कोई उद्योग भी वहां स्थापित नहीं किया गया।

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झारखंड के दिल से जुड़े हुए है जंगलमहल के लोग

आज सीमाओं के जरिए लोगों को दो राज्यों के बीच में बांट दिया गया है लेकिन दिल से हम सभी एक है। हमारी संस्कृति, हमारी वेश-भूषा, हमारी भाषा एक है।

बांग्लादेशियों को कोलकाता में नेतृत्व मिल सकता है, पर जंगलमहल के लोगों को नहीं जंगलमहल क्षेत्र की सभ्यता और संस्कृति को पश्चिम बंगाल में उचित स्थान नहीं दिया गया।

उनकी अस्मिता एवं पहचान के साथ खिलवाड़ हुआ। आज इस क्षेत्र के मुख्य पर्वों को बंगाल के मुख्य पर्वों की सूची में कोई भी स्थान नहीं दिया गया है।

77 प्रतिशत की आबादी होने के बावजूद इस क्षेत्र से एक एससी/एसटी/ओबीसी नेता राज्यसभा नहीं भेजा गया। उन्होंने कहा कि जंगल महल क्षेत्र की तरक्की के लिए स्वायत्त परिषद का गठन अनिवार्य।

यह क्षेत्र हमारी सांस्कृतिक राजधानी। चाहे बंगाल में सरकार वाम मोर्चा की हो या तृणमूल कांग्रेस की या फिर कांग्रेस की, जंगल महल इलाका दशकों से सबसे उपेक्षित रहा है।

कोलकाता में बैठे शासकों पर इन क्षेत्र के लोगों का विश्वास खत्म हो गया है।

उनकी पहचान और स्वायत्तता की समस्याओं का समाधान क्षेत्र के लिए एक स्वायत्त परिषद के गठन में निहित है।

मानभूम-जंगलमहल क्षेत्रीय प्रशासन का अविलंब गठन हो

आजसू पार्टी मांग करती है कि जंगल महल के इस इलाके (बांकुड़ा, झाड़ग्राम, मिदनापुर, पुरुलिया) को मानभूम – जंगलमहल क्षेत्रीय प्रशासन के रुप में अविलंब गठन किया जाय।

जिससे इस इलाके के राजनीतिक, सामाजिक, और आर्थिक पहचान तथा तरक्की के मार्ग प्रशस्त हो सके। आजसू पार्टी इसके गठन के लिए उस इलाके में जनमत संग्रह एवं संघर्ष को मुकाम तक पहुंचाएगी।

उन्होंने कहा कि आजसू ने अलग राज्य की लड़ाई लड़ी है और लोगों के दर्द को हम बखूबी समझते हैं। झारखंड आंदोलन में इस क्षेत्र के लोगों की भूमिका अतुल्य रही है।

अतः इस क्षेत्र की जनता एवं आंदोलनकारियों के अरमानों को पूर्ण करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ना हमारा मक़सद नहीं।

पुरुलिया को पिछड़ेपन से आज़ाद करना हमारी प्राथमिकता है। इस क्षेत्र को न्याय दिलाना हमारी प्राथमिकता है।

इस क्षेत्र में विकास का नया अध्याय लिखना हमारी प्राथमिकता। इस क्षेत्र की अस्मिता एवं आस्तित्व को मिटाने का जो प्रयास हो रहा उसे रोकना ही हमारा लक्ष्य है।

हमारा मकसद चुनाव लड़ना नहीं बल्कि इस क्षेत्र की जनता को उनका हक एवं अधिकार दिलाना है। यह संघर्ष कितना भी लम्बा हो, हम लड़ेंगे।

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