महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण ने थमी बुलेट ट्रेन की रफ्तार

News Desk
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नई दिल्ली: रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने बुधवार को बताया कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (एनएएचएसआर) में देरी मुख्य रूप से महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण और ठेकों को अंतिम रूप देने में देरी के साथ-साथ कोविड-19 के प्रतिकूल प्रभाव के कारण हुई है।

रेल मंत्री ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि एमएएचएसआर परियोजना के लिए आवश्यक कुल 1396 हेक्टेयर भूमि में से लगभग 89 प्रतिशत भूमि अर्थात लगभग 1248 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि गुजरात में 954.28 हेक्टेयर में से 942.50 हेक्टेयर (98.76%), दादर एवं नागर हवेली संघ शासित क्षेत्र में 7.90 हेक्टेयर में से 7.90 हेक्टेयर (100%) और महाराष्ट्र में 433.82 हेक्टेयर में से 297.81 हेक्टेयर (68.65%) अधिग्रहित की जा चुकी है।

उन्होंने बताया कि मुंबई-अहमदाबाद उच्च गति रेल परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध करने के लिए महाराष्ट्र राज्य में पालघर जिले की 5 गांवों की ग्राम सभाओं (ग्राम पंचायत बैठकों) में पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम।

1996 के प्रावधानों के अंतर्गत प्रस्ताव पारित किए हैं। इनमें पालघर तालुक के वरखुंती, कल्लाले, मान और खानीवाडी के अलावा दहानु तालुका के सखारे शामिल हैं।

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रेल मंत्री ने बताया कि नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) कार्यान्वयन एजेंसी, परियोजना के कार्यान्वयन के लिए राज्य सरकार अथवा जिला अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें कर रही है ।

परियोजना के फायदों, प्रभावित गांवों के भूमि गंवाने वाले ग्रामीणों को उचित मुआवजे की राशि प्रदान करने और पुनर्वास और (पुर्नस्थापन) योजना की व्यवस्था करने के बारे में इन गांवों के ग्रामीणों को निरंतर बताया भी जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 508.17 किमी लंबी मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर या बुलेट ट्रेन परियोजना की समय सीमा 2023 है।

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