रांची: राज्य में महागठबंधन की सरकार के एक साल इस माह पूरे हो जाएंगे। वर्षगांठ के मौके पर 29 दिसंबर को हेमंत सरकार जहां अपने शासनकाल की उपलब्धियां समेटने में जुटी है।
वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन का नेतृत्व कर रहा झारखंड मुक्ति मोर्चा अपने चुनावी घोषणापत्र पर अमल करने की कवायद में जुटा है।
सीएम योजनाओं की कर सकते हैं घोषणा
इस मौके पर खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उन तमाम योजनाओं की घोषणा करेंगे, जो झारखंड मुक्ति मोर्चा के चुनावी घोषणापत्र के अहम हिस्सा रहे हैं।
मोर्चा के रणनीतिकार इसपर लगातार काम कर रहे हैं और राज्य सरकार को सुझाव भी भेज रहे हैं।
झामुमो का केंद्र बिंदु संगठन का राजनीतिक आधार होगा, जिसके बूते पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को पछाड़ने में कामयाबी हासिल हुई थी।
इसमें चुनाव के दौरान किए गए तमाम वादे भी शुमार हैं।
बेहतर नियोजन से लेकर जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा झामुमो के एजेंडे में सबसे ऊपर है।
इसके अलावा झारखंड आंदोलन के शहीदों, उनके परिजनों के सम्मान व पारा शिक्षकों की समस्याओं का समाधान भी संगठन ने वरीयता क्रम में रखा है।
सरना धर्म कोड की अनुशंसा
हेमंत सरकार ने जनगणना-2021 में जनजातीय समुदाय के लिए सरना धर्म कोड कालम की अनुशंसा की है।
विधानसभा का विशेष सत्र आहूत कर इसे पारित कराया गया। जनजातीय समुदाय का इसे लेकर काफी दबाव था।
खाली पद भरने की होगी प्रक्रिया
सरकार ने खाली पड़े सरकारी पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया तेज करने की योजना बनाई है।
इसके तहत उन विभागों की नियमावली को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जहां नियुक्ति नियमावली नहीं थी।
स्वरोजगार से जोड़ने के लिए भी योजनाओं का सूत्रपात होगा। जेपीएससी और जेएसएससी की लंबित परीक्षाएं भी समय पर पूरा करने की तैयारियां है।
कल्याणकारी योजनाएं होंगी शुमार
लाभुकों को पेंशन से लेकर अन्न तक की योजनाएं भी तैयार की जा रही है। यह पूर्व से चली आ रही योजनाओं से अलग होंगी। किसानों की कर्जमाफी की योजना भी इसका हिस्सा है।
इसके अलावा प्राकृतिक आपदा में मुआवजा आदि का भी प्रस्ताव है।
300 यूनिट बिजली तक का इस्तेमाल कर रहे उपभोक्ताओं को 100 यूनिट बिजली मुफ्त कराने की घोषणा की जा सकती है। वहीं, पारा शिक्षकों के मामले में भी सकारात्मक पहल हो सकती है।