किसानों की समस्याओं को लेकर मेयर आशा लकड़ा ने की कृषि मंत्री से मुलाकात

News Aroma Media
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न्यूज़ अरोमा रांची: राज्य सरकार किसानों को उनके उपज (धान) का निर्धारित मूल्य भुगतान करने में पूरी तरह विफल है। किसान खलिहानों में जमा किए गए धान की बिक्री के लिए परेशान हैं।

उन्हें अब तक न तो मंडी की सुविधा मिली और न ही राज्य सरकार की ओर से खोले गए धान क्रय केंद्रों का।

मंगलवार को ये बातें मेयर आशा लकड़ा ने कहीं। इससे पूर्व उन्होंने कृषि मंत्री बादल पत्रलेख से मुलाकात कर उन्हें किसानों को हो रही परेशानी का समाधान करने के लिए ज्ञापन भी सौंपा।

मेयर ने कहा कि वह स्वयं किसान की बेटी है। किसानों की मेहनत की उपज और सेठ-साहूकारों व बिचैलियों के खेल से वह अच्छी तरह वाकिफ हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने धान की खरीदारी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की, ताकि किसानों को उनकी उपज का निर्धारित मूल्य मिल सके।

लेकिन हेमंत सरकार ने अपनी वाहवाही बटोरने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ-साथ प्रति क्विंटल बोनस राशि देने की घोषणा कर किसानों को अपनी मायाजाल में फंसाने के काम किया।

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राज्य सरकार के एक मंत्री ने गीला धान का हवाला देते हुए धान क्रय केंद्रों को खोलने पर लगाम लग दी, जिससे किसान काफी मायूस हुए। मंत्री के इस फरमान से किसानों के खलिहान तक बिचैलियों का राज कायम हो गया है।

राज्य सरकार की घोषणा के बाद भी सभी जिलों में पर्याप्त संख्या में धान क्रय केंद्र नहीं खुले हैं। ऐसे हालात में किसान धान की बिक्री के लिए कहां जाएं।

नतीजतन आज किसान बिचैलियों को एक हजार से 1,300 रुपये प्रति क्विंटल धान बेचने के लिए विवश हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार झारखंड के किसानों की स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ है। यहां के किसानों के पास धान के फसल को अधिक दिनों तक रखने की कोई सुविधा नहीं है।

वर्तमान हालात ऐसे हैं कि धान क्रय केंद्र में धान की बिक्री करने से पूर्व उन्हें निबंधन कराना होगा। यदि किसी किसान ने निबंधन नहीं कराया है तो उसे धान क्रय केंद्र में धान की बिक्री करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को धान क्रय केंद्रों पर ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि किसानों को निराश होकर लौटना न पड़े। जिन किसानों ने अब तक निबंधन नहीं कराया है, उनके लिए संबंधित धान क्रय केंद्र पर ही निबंधन की सुविधा होनी चाहिए।

मेयर ने कहा कि जिन जिलों में इक्के-दुक्के धान क्रय केंद्र खोले गए हैं, वहां किसानों का धान क्रय करने के बाद भी 50 फीसद राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है। ऐसे में किसान हतोत्साहित हो रहे हैं।

राज्य सरकार की रीति व नीति से झारखंड के किसान असंतुष्ट हैं। राज्य सरकार की ओर से घोषणा की गई है कि धान क्रय करने के बाद संबंधित किसानों को उसी दिन प्रति क्विंटल की निर्धारित मूल्य के हिसाब से 50 फीसद राशि उनके बैंक खाता में हस्तांतरित कर दी जाएगी।

शेष 50 फीसद राशि मिल में धान जाने के बाद भुगतान की जाएगी। उन्होंने राज्य सरकार से सवाल किया है कि शेष 50 फीसद राशि के भुगतान के लिए समय सीमा तय क्यों नहीं की गई।

किसान इस राशि के लिए कब तक इंतजार करेंगे। झारखंड के किसान इतने अमीर नहीं हैं कि अपनी उपज की आधी राशि से अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें या अन्य जरूरतों को पूरा कर सकें।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की इस नीति से किसानों के मन मे तरह-तरह के सवाल उत्पन्न हो रहे हैं। यदि राज्य सरकार किसानों की हितैषी है तो किसानों को धान क्रय करने के साथ ही प्रति क्विंटल निर्धारित मूल्य का एकमुश्त भुगतान किया जाए।

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