हाथ की उंगलियों से भी पहचाना जा सकता है कि कोई साइकोपैथ है या नहीं, जानिए…

मस्तिष्क में Chemical Imbalance की वजह मनोविकार पैदा होते हैं। हालांकि कई बार लोगों को खुद ही पता नहीं चल पाता कि वे कब इसके शिकार होकर साइकोपैथ बन चुके होते हैं।

News Aroma Media
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Pyschology: आज भागदौड़ की दुनिया में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के साथ हम सब ने कही मानसिक स्वास्थ्य को पीछे छोड़ दिया हैं, यही कारण हैं कि दुनियाभर में कई लोग मनोरोग से जूझ रहे हैं।

मस्तिष्क में Chemical Imbalance की वजह मनोविकार पैदा होते हैं। हालांकि कई बार लोगों को खुद ही पता नहीं चल पाता कि वे कब इसके शिकार होकर साइकोपैथ बन चुके होते हैं।

यही कारण है कि बहुत कम लोग डॉक्टर्स के पास कंसल्ट करने जाते हैं। दुनियाभर के रिसर्चर्स मनोरोग के कारणों पर काम कर रहे हैं।

अब Researchers ने एक ऐसा तरीका ईजाद किया है, जिससे चुटकियों में पता चल जाएगा कि कोई व्यक्ति साइकोपैथ है या नहीं। खास बात यह है कि इसे हाथ की उंगलियों से पहचाना जा सकता है।

Ring Finger Index Finger से ज्यादा बड़ी होने पर संभावना

क्यूबेक में सेंटर डी रेचेर्चे चार्ल्स-ले मोयने के शोधकर्ताओं ने चौंकाने वाला दावा किया है। रिसर्च में दावा किया गया है कि जिन लोगों की रिंग फिंगर यानी अनामिका उंगली, तर्जनी उंगली से ज्यादा बड़ी होती है, उनमें मनोरोगी प्रवृत्ति होने की संभावना ज्यादा होती है।

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स्टडी के लिए रिसर्चर्स ने 80 लोगों का विश्लेषण किया। उनके हाथों की उंगलियों का विश्लेषण करने से पता चला कि 44 प्रतिभागियों में एम्फ़ैटेमिन यूज डिसऑर्डर (AUD) और एंटी सोशल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (ASPD) था। जबकि 36 लोग स्वस्थ थे।

जर्नल ऑफ साइकिएट्रिक रिसर्च में सामने आया है कि इस तरह के व्यवहार वाले लोगों को सामाजिक रूप से समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे लोग समाज के लिए समस्याएं भी पैदा कर सकते हैं।

Biological हो सकते हैं इस तरह के व्यवहार

वैज्ञानिकों ने ये भी कहा है कि इस तरह के व्यवहार बायोलॉजिकल हो सकते हैं। दुनियाभर के शोधकर्ताओं का मानना है कि मनोरोग में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। कहा ये भी जा रहा है कि दुनिया की 50 फीसदी आबादी में 75 साल की उम्र तक मानसिक विकार का जोखिम हो सकता है।

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