मुंबई: शिवसेना ने पीएम नरेंद्र मोदी से आंदोलनकारी किसानों की भावनाओं का सम्मान करने और नए विवादास्पद कृषि कानूनों को रद्द करने का आग्रह कर कहा कि ऐसा करने से उनका कद और बढ़ेगा।
सामना के संपादकीय में केंद्र सरकार पर उच्चतम न्यायालय का इस्तेमाल कर किसानों के प्रदर्शन को खत्म करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया।
संपादकीय में कहा गया कि उच्चतम न्यायालय के समक्ष केंद्र का यह दावा चौंकाने वाला है कि किसानों के प्रदर्शन में खालिस्तानी घुसे हुए हैं।
यदि खालिस्तानियों ने विरोध प्रदर्शन में घुसपैठ की है, तब यह सरकार की विफलता है।
सरकार विरोध को समाप्त नहीं करना चाहती है, बल्कि आंदोलन को देशद्रोह का रंग देकर राजनीति करना चाहती है।
सामना में कहा गया, प्रधानमंत्री मोदी को किसानों के विरोध और साहस का स्वागत कर कानूनों को खत्म कर देना चाहिए।
मोदी का आज जितना बड़ा कद है, ऐसा करने से उनका कद और बड़ा हो जाएगा।
26 जनवरी को दिल्ली में किसानों की निर्धारित ट्रैक्टर रैली का जिक्र करते हुए संपादकीय में कहा गया कि अगर सरकार चाहती है कि स्थिति और न बिगड़े, तब किसानों की भावनाओं को समझने की जरूरत है।
उसमें कहा गया कि इस प्रदर्शन में अब तक 60 से 65 किसानों की जान जा चुकी है और देश ने आजादी के बाद अब तक ऐसा अनुशासित आंदोलन नहीं देखा है।