रांची: National Commission for Protection of Child Rights राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने आरपीएफ अफसर के घर से मुक्त कराई गई नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता मामले में स्वत: संज्ञान लिया है।
मामले में आयोग ने रांची के एसएसपी निर्देश देते हुए कहा है कि बालिका की पहचान की गोपनीयता हर स्तर पर सुनिश्चित करते हुए प्रकरण में त्वरित कार्रवाई करें।
आयोग ने मामले से संबंधित पूरी जानकारी सात दिन में देने को कहा है।
आयोग ने पीड़िता की आयु की प्रमाणिक जानकारी, प्रकरण में दर्ज पोक्सो एक्ट 2012 के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट स्पष्ट एवं सत्यापित प्रतिलिपि, आरोपी के खिलाफ की गई कार्यवाही का विवरण, पीड़िता के मेडिकल रिपोर्ट की प्रतिलिपि, पीड़िता का 164 का बयान का कॉपी, बाल कल्याण समिति के आदेशों और निर्देशों की स्पष्ट एवं सत्यापित प्रतिलिपि, पीड़िता की काउंसलिंग के लिए की गई कार्यवाही का विवरण, बाल कल्याण समिति के आदेशों निर्देशों की स्पष्ट एवं सत्यापित प्रतिलिपि, पीड़िता को मुआवजा दिलाने के लिए उठाए गए कदम का विवरण सहित अन्य बिंदुओं पर जानकारी मांगी है।
क्या है मामला
उल्लेखनीय है कि रांची के चुटिया थाना क्षेत्र में सेरसा स्टेडियम के ठीक सामने अधिकारियों के लिए बने अतिथि गृह में मुख्य सर्तकता पदाधिकारी सह ओएसडी मो. साकिब रहते है।
उनके घर में रहने वाली एक 14 साल की नाबालिग आदिवासी लड़की के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया था।
लेकिन इस मामले में थाने में बिना प्राथमिकी दर्ज कराए आरोपी आरक्षी ठाकुर शंभू नाथ पर रेलवे ने विभागीय कार्रवाई चलाते हुए उसे बर्खास्त कर दिया था। घटना का खुलासा जून के पहले सप्ताह में हुआ।
इसके बाद आरोपी ठाकुर शंभू नाथ को चार जून को पहले निलंबित किया गया।
फिर आरोपी से एक विभागीय टीम ने आकर पूछताछ की और आठ जून को उसे बर्खास्त कर दिया गया।
नाबालिग लड़की के साथ शारीरिक व मानसिक शाेषण के आराेप लगे जवान शंभु ठाकुर की बर्खास्तगी वापस हाे गयी है।
अब जांच हाेने तक वह निलंबित रहेगा। हाजीपुर रेल मुखालय ने आरपीएफ के उप मुख्य सुरक्षा आयुक्त के आदेश काे निरस्त कर दिया है। मुख्यालय ने सभी तथ्यों का गहन अध्ययन करने के बाद यह निर्णय लिया है।
बर्खास्तगी के तथ्यों में विराेधाभाष है। रिपाेर्ट में कहा गया है कि अगर आराेप लगाए गए थे ताे नियमानुसार जांच करके दाेषी पाए जाने पर आराेपी काे दंडित करना उचित हाेता, जिसे दरकिनार किया गया है।
इसलिए आरपीएफ अधिकारी के द्वारा दिए गए दंड काे निरस्त किया गया। फिलहाल उसे निलंबित कर पूरे मामले की जांच आरपीएफ के डीआईजी डीके मौर्या कर रहे हैं।